UP : लखनऊ में रविवार को सरकारी जमीन और फुटपाथों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ बड़ा एक्शन हुआ है। जिला कोर्ट और कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास बने वकीलों के अवैध चैंबरों और करीब 240 दुकानों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। यह
UP : लखनऊ में रविवार को सरकारी जमीन और फुटपाथों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ बड़ा एक्शन हुआ है। जिला कोर्ट और कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास बने वकीलों के अवैध चैंबरों और करीब 240 दुकानों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। यह पूरी कार्रवाई राज्य सरकार ने नहीं, बल्कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सख्त आदेश के बाद की गई है।
क्यों हुई यह बुलडोजर कार्रवाई और क्या था आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की बेंच ने सार्वजनिक भूमि और नालों पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए। नगर निगम ने अतिक्रमणकारियों को 16 मई तक खुद कब्जा हटाने का समय दिया था, लेकिन ऐसा न होने पर 17 मई को अभियान शुरू किया गया। प्रशासन ने बताया कि इन अवैध निर्माणों की वजह से शहर में ट्रैफिक जाम, गंदगी और जलभराव की समस्या बनी रहती थी।
कितने चैंबर टूटे और प्रशासन ने क्या तैयारी की
नगर निगम ने इस अभियान को तीन अलग-अलग दिशाओं से एक साथ चलाया ताकि कोई विरोध न हो सके। अब तक 100 से ज्यादा वकीलों के चैंबर तोड़े जा चुके हैं और कुल 240 अवैध कब्जों को हटाने का लक्ष्य है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि शांति बनी रहे। जोन-1 के जोनल अधिकारी ओपी सिंह ने बताया कि इस ध्वस्तीकरण में जो भी खर्च आएगा, उसकी वसूली सीधे उन अतिक्रमणकारियों से की जाएगी जिन्होंने अवैध कब्जा किया था।
वकीलों का विरोध और आगे की प्रक्रिया
कार्रवाई के दौरान कई वकीलों ने इसका विरोध किया और प्रशासन से बैठने के लिए किसी वैकल्पिक जगह की मांग की। हालांकि, कोर्ट के आदेश के कारण नगर निगम की टीम लगातार काम कर रही है। हाईकोर्ट ने अधिकारियों से 25 मई 2026 तक इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें बताना होगा कि कितना अतिक्रमण हटाया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में बुलडोजर कार्रवाई किस आधार पर की गई?
यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ खंडपीठ) के आदेश पर की गई है, जिसमें सार्वजनिक भूमि, फुटपाथ और सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने का निर्देश दिया गया था।
ध्वस्तीकरण का खर्च कौन उठाएगा?
लखनऊ नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माणों को तोड़ने में आने वाला पूरा खर्च उन अतिक्रमणकारियों से ही वसूला जाएगा जिन्होंने कब्जा किया था।