Lucknow में वकील इंद्रदेव सिंह मर्डर केस में फैसला, 3 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा

UP/Lucknow: लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता, अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में तीन दोषियों को

UP/Lucknow: लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता, अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। करीब 24 साल तक चले इस लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अब दोषियों को सजा मिली है।

यह पूरी घटना 8 अगस्त 2002 की है। इंद्रदेव सिंह अदालत से अपने स्कूटर पर लौट रहे थे, तभी जिलाधिकारी कार्यालय के पीछे उन पर हमला किया गया और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले की शिकायत उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने कैसरबाग थाने में दर्ज कराई थी। सीबीआई ने 2004 में इस केस में आरोपपत्र दाखिल किया था।

जांच में पता चला कि इस हत्या के पीछे महज पांच बीघा जमीन का विवाद था। मुख्य साजिशकर्ता मन्ना लाल गुप्ता नाम का एक बर्खास्त लेखपाल था। इंद्रदेव सिंह ने मड़ियांव के सिमरी गौड़ा में अपनी जमीन की प्लॉटिंग का काम उसे सौंपा था, लेकिन मन्ना लाल ने बिना बताए भूखंड बेचे और पैसे खुद रख लिए। इसी विवाद के कारण जुलाई 2002 में हत्या की साजिश रची गई।

साजिश के तहत बृजेश यादव ने छोटेलाल उर्फ छोटू को 50,000 रुपये की सुपारी दी थी, जिसमें से 10,000 रुपये पहले ही दे दिए गए थे। बृजेश ने हत्या के लिए अपना स्कूटर भी दिया और उसकी पहचान छिपाने के लिए दिल्ली नंबर की प्लेट लगाई थी। हमले के वक्त विक्रम यादव उर्फ कालिया ने गोली चलाई और बृजेश स्कूटर चला रहा था।

दोषी का नाम भूमिका सजा
विक्रम यादव उर्फ कालिया शूटर आजीवन कारावास + जुर्माना
बृजेश कुमार यादव उर्फ मुन्ना स्कूटर चालक आजीवन कारावास + जुर्माना
पन्ना सिंह सह-आरोपी आजीवन कारावास + जुर्माना

विशेष न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा ने 7 जुलाई 2026 को यह फैसला सुनाया। अदालत ने तीनों दोषियों पर आजीवन कारावास के साथ जुर्माना भी लगाया है। विक्रम यादव पहले से जेल में था, जबकि पन्ना सिंह और बृजेश जमानत पर बाहर थे, जिन्हें अब वापस न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता मन्ना लाल गुप्ता, वेद प्रकाश और छोटेलाल की मुकदमे के दौरान ही मौत हो गई थी।