UP: लखनऊ में रविवार सुबह उस वक्त हंगामा मच गया जब नगर निगम की टीम बुलडोजर लेकर अवैध निर्माण गिराने पहुंची। जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय और पुराने हाई कोर्ट परिसर के पास करीब 240 अवैध चैंबर और दुकानों को हटाया गया। इस कार्रवा
UP: लखनऊ में रविवार सुबह उस वक्त हंगामा मच गया जब नगर निगम की टीम बुलडोजर लेकर अवैध निर्माण गिराने पहुंची। जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय और पुराने हाई कोर्ट परिसर के पास करीब 240 अवैध चैंबर और दुकानों को हटाया गया। इस कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद वकीलों और पुलिस के बीच जमकर धक्का-मुक्की और झड़प हुई, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया।
बुलडोजर कार्रवाई की वजह और हाई कोर्ट का आदेश क्या था
यह पूरी कार्रवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर की गई। कोर्ट ने पाया था कि सार्वजनिक रास्तों पर अवैध रूप से चैंबर बनाकर रास्ता रोका गया है। कोर्ट ने मार्च और अप्रैल 2026 में सख्त निर्देश दिए थे कि इन अवैध निर्माणों को हटाया जाए। नगर निगम ने 12 मई को इन जगहों पर लाल निशान लगाए थे और 16 मई तक खाली करने का समय दिया था। समय सीमा खत्म होने के बाद 17 मई को प्रशासन ने बुलडोजर चलाया।
मौके पर क्या हुआ और पुलिस की क्या प्रतिक्रिया रही
सुबह 9 बजे जब टीम पहुंची तो वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पत्थर फेंके, जिसके बाद पुलिस को भीड़ हटाने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। स्थिति को संभालने के लिए 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी, PAC और चार ACP तैनात किए गए थे। डीसीपी वेस्ट कमलेश दीक्षित ने बताया कि कार्रवाई कोर्ट के आदेश के तहत हो रही थी और पुलिस ने केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बल का प्रयोग किया।
विरोध के दौरान हुए गंभीर हादसे और आरोप
इस हंगामे के बीच एक वकील ने विरोध जताते हुए अपने चैंबर के अंदर जान देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें समय रहते बचा लिया। कुछ वकीलों ने पुलिस पर यह आरोप भी लगाया कि लाठीचार्ज के दौरान खास समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया। वहीं, कई वकीलों ने विवाद बढ़ता देख खुद ही अपने अवैध निर्माण को हटाना शुरू कर दिया था। प्रशासन अब भी इलाके में निगरानी रख रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में बुलडोजर की कार्रवाई क्यों की गई?
यह कार्रवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर की गई क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय और पुराने हाई कोर्ट परिसर के पास सार्वजनिक रास्तों पर करीब 240 अवैध चैंबर और दुकानें बनाई गई थीं।
प्रशासन ने कार्रवाई से पहले क्या कदम उठाए थे?
नगर निगम ने 12 मई 2026 को अवैध निर्माणों पर लाल निशान लगाए थे और उन्हें 16 मई तक खाली करने का नोटिस दिया था।