Lucknow: नदियों में बढ़ी घड़ियालों की संख्या, कुकरैल सेंटर से गंगा और घाघरा में छोड़े जाएंगे सैकड़ों बच्चे
Lucknow: उत्तर प्रदेश की नदियों में घड़ियालों की बढ़ती संख्या पर्यावरण के लिए अच्छी खबर लेकर आई है। गंगा, घाघरा, चंबल, यमुना, केन और तमसा जैसी मुख्य नदियों में इन जीवों का दिखना यह बताता है कि नदियों का पानी अब पहले से ज
Lucknow: उत्तर प्रदेश की नदियों में घड़ियालों की बढ़ती संख्या पर्यावरण के लिए अच्छी खबर लेकर आई है। गंगा, घाघरा, चंबल, यमुना, केन और तमसा जैसी मुख्य नदियों में इन जीवों का दिखना यह बताता है कि नदियों का पानी अब पहले से ज्यादा साफ और प्रदूषण मुक्त हुआ है। कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र इस काम में बड़ी भूमिका निभा रहा है, जहाँ से हर साल बड़ी संख्या में घड़ियालों को उनके प्राकृतिक आवास में भेजा जाता है।
कुकरैल सेंटर में इस समय कुल 466 घड़ियाल हैं और यहाँ हर साल 140 से 160 नए बच्चे पैदा होते हैं। सेंटर की रेंजर अनामिका सिंह ने बताया कि घड़ियाल अपने पर्यावरण के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं, इसलिए उनका बढ़ना नदियों की सेहत का सबूत है। हाल ही में 26 जून को कुकरैल सेंटर से 2000 से ज्यादा घड़ियाल के बच्चों को घाघरा नदी में छोड़ा गया था।
वन विभाग के लुप्तप्राय प्रजाति प्रभाग के कंजर्वेटर संजय कुमार बिस्वाल के मुताबिक, 1970 के दशक में पूरे देश में सिर्फ 250-300 घड़ियाल ही बचे थे। अब स्थिति बदल रही है। इस साल Namami Gange प्रोजेक्ट के तहत कुकरैल सेंटर में कम से कम 500 अंडों से आर्टिफिशियल हैचिंग कराने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि गंगा और उसकी सहायक नदियों में इनकी आबादी और बढ़ सके।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि घड़ियालों के संरक्षण से प्रदेश में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिला है। उन्होंने नदियों के इकोसिस्टम को बचाने पर जोर दिया। नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी ने जून 2025 में कुकरैल सेंटर के प्रोजेक्ट को भारत का सबसे सफल संरक्षण प्रोजेक्ट माना था।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ब्रीडिंग सेंटर से काम नहीं चलेगा, बल्कि नदियों में रेत खनन और प्रदूषण को रोकना होगा ताकि घड़ियाल प्राकृतिक रूप से जीवित रह सकें। बिहार के गंडक नदी क्षेत्र में भी बिहार वन विभाग और Wildlife Institute of India घड़ियालों के घोंसलों की निगरानी कर रहे हैं।