Lucknow के खरगापुर में सार्वजनिक जमीन से हटेगा कब्जा, हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने शुरू की कार्रवाई

Lucknow/UP : राजधानी के खरगापुर गांव में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे करने वालों की अब खैर नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है, जिसके बाद नगर निगम और राजस्व विभाग हरकत में आ गए हैं। प्

Lucknow/UP : राजधानी के खरगापुर गांव में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे करने वालों की अब खैर नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है, जिसके बाद नगर निगम और राजस्व विभाग हरकत में आ गए हैं। प्रशासन ने अब उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके।

यह पूरा मामला विनय मिश्रा द्वारा नगर आयुक्त और तहसीलदार सदर के खिलाफ दायर एक अवमानना याचिका से जुड़ा है। न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र के जरिए बताया कि अवैध कब्जे हटाने की विधिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसे अगले 90 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इससे पहले 19 मार्च 2026 को न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने एक जनहित याचिका पर आदेश दिया था। कोर्ट ने अधिकारियों को गाटा संख्या 248, 227 सा, 228, 246 और 247 की जमीनों का निरीक्षण करने को कहा था। इन जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में तालाब, ऊसर और बंजर के रूप में दर्ज किया गया है। कोर्ट ने साफ कहा था कि अगर अतिक्रमण पाया जाता है, तो संबंधित लोगों को सुनवाई का मौका देने के बाद तीन महीने में कब्जा हटाया जाए।

फिलहाल कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही को खत्म कर दिया है, लेकिन याचिकाकर्ता को यह छूट दी गई है कि अगर पांच महीने में आदेश का पालन नहीं होता है, तो वह दोबारा कोर्ट जा सकते हैं। धारा 67 के तहत तहसीलदार और एसडीएम जैसे अधिकारियों को नोटिस जारी करने और बेदखली का आदेश देने का अधिकार होता है। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमों के अनुसार ही की जाएगी।