Lucknow के KGMU हॉस्टल मेस में नॉनवेज बैन, राज्यपाल के निरीक्षण के बाद लिया गया फैसला

Lucknow: राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) ने अपने सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में मांसाहारी भोजन पकाने और परोसने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह फैसला 14 जुलाई 2026 को लिया गया, जिसके बाद यूनिवर्सिटी के 21

Lucknow: राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) ने अपने सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में मांसाहारी भोजन पकाने और परोसने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह फैसला 14 जुलाई 2026 को लिया गया, जिसके बाद यूनिवर्सिटी के 21 हॉस्टल मेस को लिखित आदेश जारी किए गए हैं। अब इन मेस में अंडा और मांस बनाना प्रतिबंधित रहेगा।

यह कदम उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के हालिया निरीक्षण के बाद उठाया गया है। राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति के तौर पर हॉस्टलों में स्वच्छता की कमी और कुछ मेस में नॉनवेज बनने पर चिंता जताई थी। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर बैन का आदेश नहीं दिया था, लेकिन उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और सफाई सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्य प्रोवोस्ट प्रो. कमल कुमार सावलानी ने यह आदेश जारी किया।

KGMU के प्रवक्ता प्रो. के.के. सिंह ने साफ किया है कि यह पाबंदी सिर्फ यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित मेस और सहकारी रसोई पर है। छात्र बाहर से नॉनवेज मंगवा सकते हैं या खुद निजी तौर पर तैयार कर सकते हैं। हॉस्टल इंचार्ज एस.एन. सिंह के मुताबिक, छात्रों को अब प्रोटीन के लिए दाल, पनीर, सोयाबीन, दूध और दही जैसे शाकाहारी विकल्प दिए जाएंगे।

इस फैसले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए इसे हिंदू-मुस्लिम की राजनीति बताया है। उन्होंने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद का खाना चुनने की आजादी देता है। वहीं समाजवादी पार्टी ने इसे तुगलकी फरमान करार दिया है और सवाल उठाया है कि जब डॉक्टर खुद मांस और अंडे को प्रोटीन का स्रोत बताते हैं, तो यह फैसला कैसे लिया गया। कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने इसे तानाशाही और असंवैधानिक बताया है।

दूसरी तरफ, बीजेपी प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि पार्टी किसी पर कुछ थोपती नहीं है, लेकिन जहां शाकाहारी और मांसाहारी दोनों रहते हैं, वहां सबकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। वहीं, कई संतों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिहाज से सही बताया है। यूनिवर्सिटी के छात्रों में भी इस मुद्दे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है।