Lucknow में मौत को मात, शरीर के आर-पार थीं 4 सरिया; KGMU के डॉक्टरों ने 8.5 घंटे की सर्जरी से बचाई मजदूर की जान
Lucknow: राजधानी के KGMU ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक ऐसा करिश्मा किया है जिसने मौत को भी हरा दिया। एक निर्माणाधीन इमारत से गिरने के कारण 23 साल के मजदूर के शरीर में लोहे की चार सरिया आर-पार हो गई थीं। डॉक्टरों ने करीब
Lucknow: राजधानी के KGMU ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक ऐसा करिश्मा किया है जिसने मौत को भी हरा दिया। एक निर्माणाधीन इमारत से गिरने के कारण 23 साल के मजदूर के शरीर में लोहे की चार सरिया आर-पार हो गई थीं। डॉक्टरों ने करीब 8 घंटे 30 मिनट तक चली एक बहुत ही जटिल सर्जरी के बाद मजदूर की जान बचा ली है।
यह हादसा 13 जुलाई 2026 को सुबह करीब 4:30 बजे बादशाह नगर इलाके में हुआ था। फर्रुखाबाद के नरैया गाँव का रहने वाला उमेश एक निर्माणाधीन इमारत में काम कर रहा था, जहाँ से वह अचानक नीचे गिर गया। हादसे के बाद उसे सुबह 5:30 बजे KGMU ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जहाँ सुबह 7 बजे उसकी सर्जरी शुरू हुई और दोपहर 3:30 बजे यह ऑपरेशन पूरा हुआ।
प्रो. डॉ. समीर मिश्रा और डॉ. नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने यह कठिन काम किया, जबकि एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. विपिन ने किया। इस हादसे में सरिया ने उमेश के फेफड़े, आमाशय, छोटी आंत, प्लीहा और मूत्राशय जैसे कई जरूरी अंगों को गंभीर नुकसान पहुँचाया था। डॉक्टरों ने मूत्राशय के तीन छेदों और छोटी आंत के छिद्रों के साथ-साथ फटे हुए डायफ्राम की भी मरम्मत की।
ऑपरेशन के दौरान एक समय ऐसा आया जब मरीज का ब्लड प्रेशर तेजी से गिर गया, लेकिन टीम ने सूझबूझ से स्थिति को संभाल लिया। KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने पूरी टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी है। उमेश आर्थिक रूप से कमजोर है, इसलिए KGMU प्रशासन और चौक के चंदरानी जैन चैरिटेबल ट्रस्ट ने उसके इलाज के लिए पैसों की मदद की है। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है और वह ICU में डॉक्टरों की निगरानी में है।
KGMU ट्रॉमा सेंटर के प्रो. समीर मिश्रा ने आम लोगों को एक जरूरी सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी हादसे में शरीर में सरिया, चाकू या कोई नुकीली चीज घुस जाए, तो उसे अस्पताल पहुँचने से पहले बाहर निकालने की कोशिश बिल्कुल न करें। ऐसा करने से बहुत ज्यादा खून बह सकता है और जान जा सकती है। ऐसी चीजों को केवल ऑपरेशन थिएटर में विशेषज्ञों की देखरेख में ही निकाला जाना चाहिए।