UP : लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में स्थित कसमंडी कला एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। यहाँ एक प्राचीन स्थल को लेकर पासी समाज और मुस्लिम समुदाय के बीच खींचतान चल रही है। मामला अब धार्मिक पहचान और राजनीति तक पहुँच गया है, जि
UP : लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में स्थित कसमंडी कला एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। यहाँ एक प्राचीन स्थल को लेकर पासी समाज और मुस्लिम समुदाय के बीच खींचतान चल रही है। मामला अब धार्मिक पहचान और राजनीति तक पहुँच गया है, जिसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है।
कसमंडी विवाद क्या है और दावे क्या हैं?
पासी समाज का कहना है कि यह जगह 11वीं सदी के नागवंशी राजा कंस पासी का किला और शिव मंदिर था। उनका दावा है कि दीवारों पर हिंदू प्रतीक बने हुए हैं, जिन्हें बाद में मस्जिद और मकबरे में बदल दिया गया। दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह हमेशा से मस्जिद और मजार रहा है और सरकारी कागजों में भी यही दर्ज है। अयोध्या के संतों ने भी पासी समाज के दावे का समर्थन किया है।
प्रशासन ने सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने कसमंडी कला में सभी धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है। बकरीद की नमाज और हिंदू संगठनों द्वारा किए जाने वाले सुंदरकांड पाठ की अनुमति नहीं दी गई है। इलाके में भारी पुलिस बल और PAC तैनात है। सुरक्षा के लिए ड्रोन और CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है। जिलाधिकारी विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
जांच और राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या है?
लाखन पासी संगठन और स्थानीय लोगों ने ASI और राज्य पुरातत्व निदेशालय से वैज्ञानिक जांच की मांग की है। पुरातत्व विभाग ने कहा है कि शासन से निर्देश मिलने पर विशेषज्ञों की टीम भेजी जाएगी। वहीं, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने इसे भाजपा की साजिश बताया है, हालांकि उन्होंने पासी समाज के इतिहास को स्वीकार किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कसमंडी कला विवाद में पासी समाज की क्या मांग है?
पासी समाज का दावा है कि यह स्थल महाराजा कंस पासी का किला और शिव मंदिर है। उन्होंने ASI और पुरातत्व निदेशालय से इसकी वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है।
प्रशासन ने विवादित स्थल पर क्या प्रतिबंध लगाए हैं?
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बकरीद की नमाज, सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा सहित सभी धार्मिक गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी है।