Lucknow के कसमंडी किले को लेकर तनाव, पासी समाज ने जताया दावा, भारी पुलिस बल तैनात
Lucknow/Malihabad: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में स्थित कसमंडी किला इन दिनों विवादों के केंद्र में है। किले के मालिकाना हक और उसकी पहचान को लेकर दो पक्षों के बीच खींचतान चल रही है, जिससे इलाके में तना
Lucknow/Malihabad: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में स्थित कसमंडी किला इन दिनों विवादों के केंद्र में है। किले के मालिकाना हक और उसकी पहचान को लेकर दो पक्षों के बीच खींचतान चल रही है, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया है। शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन ने यहाँ भारी पुलिस बल और PAC की तैनाती की है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस किले का निर्माण 980 से 1031 ईस्वी के बीच नागवंशी महाराजा कंस पासी के वंशजों या राजा कस ने करवाया था। पासी समुदाय का दावा है कि यह महाराजा कंस पासी का पैतृक महल है और यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर भी है। उनका कहना है कि किले की दीवारों पर नाग कलश और कमल के फूल जैसी सनातन संस्कृति की आकृतियां मौजूद हैं। वहीं दूसरी तरफ, मुस्लिम पक्ष का मानना है कि यह संरचना एक मस्जिद, मकबरा या वक्फ संपत्ति है।
तनाव तब और बढ़ गया जब 3 अगस्त 2026 को चेहल्लुम और सावन के पहले सोमवार का समय एक साथ आया। इस मौके पर ‘लाखन आर्मी’ नामक संगठन के नेता सूरज पासी ने किले में जलाभिषेक करने और 108 गांवों की पवित्र मिट्टी चढ़ाने की घोषणा की थी। उन्होंने इसके लिए जिलाधिकारी से अनुमति भी मांगी थी ताकि गंगाजल से किले का शुद्धिकरण किया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। विवादित स्थल पर किसी भी नए धार्मिक आयोजन या गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि जो कोई भी कानून हाथ में लेगा या शांति भंग करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, किले के वास्तविक स्वरूप और इतिहास का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वे कराने की मांग भी उठ रही है।