Lucknow-Kanpur Expressway निर्माण में घोटाले का आरोप, हाईकोर्ट ने केंद्र और यूपी सरकार से मांगा जवाब

UP: लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।

UP: लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और यूपी के परिवहन विभाग को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह पूरा विवाद 10 अगस्त 2026 को दायर एक जनहित याचिका (PIL) के बाद शुरू हुआ। याचिका में आरोप लगाया गया कि एक्सप्रेसवे के सिविल काम में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। साथ ही टोल टैक्स को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर टोल ₹1.99 प्रति किमी है, जबकि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर यह ₹4.35 प्रति किमी है, जो कि दोगुने से भी ज्यादा है। इसी वजह से याचिका में सीबीआई जांच की मांग की गई है।

एक्सप्रेसवे की हालत इतनी खराब रही कि उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही यह 15 जगहों से धंस गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी का सही तकनीकी टेस्ट किए बिना ही सड़क बना दी गई, जिससे यह वजन नहीं सह पाई। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल टोल कलेक्शन माफ कर दिया है। आईआईटी खड़गपुर की टीम इसकी जांच कर रही है और कुछ विशेषज्ञों ने तो सड़क को मरम्मत के लिए तुरंत बंद करने की सलाह दी है।

इस मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अब बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। NHAI ने निर्माण कंपनी मेसर्स PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को ‘नॉन-परफ़ॉर्मर’ घोषित करने का प्रस्ताव भेजा है। अगर ऐसा होता है, तो यह कंपनी भविष्य में NHAI के किसी भी नए टेंडर में हिस्सा नहीं ले पाएगी। इसके अलावा, प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को तुरंत हटा दिया गया है। इन तीनों पर अगले दो साल तक किसी भी सरकारी सड़क परियोजना में काम करने पर रोक लगा दी गई है।

प्रशासनिक लापरवाही के चलते पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया और वर्तमान निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा के खिलाफ भी आरोप-पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दूसरी तरफ, राजनीतिक गलियारों में भी यह मामला गरमाया हुआ है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने राज्यपाल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। आरोप है कि निर्माण कंपनी के संबंध भाजपा सांसद से हैं, इसलिए उसे बचाने की कोशिश की जा रही है। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने भी इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मामला बताया है।