Lucknow-Kanpur Expressway पर धंसी सड़क, NHAI ने PNC इंफ्राटेक पर लगाया जुर्माना, टोल वसूली बंद
UP : लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड सेक्शन में सड़क धंसने और जल निकासी की गंभीर खामियां सामने आई हैं। यह स्थिति तब पैदा हुई जब इस प्रोजेक्ट को फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल चुका था। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राध
UP : लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड सेक्शन में सड़क धंसने और जल निकासी की गंभीर खामियां सामने आई हैं। यह स्थिति तब पैदा हुई जब इस प्रोजेक्ट को फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल चुका था। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस मामले में ठेकेदार कंपनी PNC इंफ्राटेक पर जुर्माना लगाया है और टोल वसूली को तब तक के लिए निलंबित कर दिया है जब तक मरम्मत का काम पूरा नहीं हो जाता।
इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को हुआ था, लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद 26 जुलाई को कोरारी के पास किमी संख्या 64 पर करीब 30 मीटर सड़क धंस गई। इसके बाद लगातार शिकायतें आईं और 7 अगस्त तक सड़क धंसने के कुल 15 मामले दर्ज किए गए। उन्नाव सीमा क्षेत्र के 45 किलोमीटर हिस्से में 60 जगहों पर पैचवर्क किया गया है। कुल मिलाकर एक्सप्रेसवे पर 84 स्थानों पर मरम्मत की जरूरत पड़ी, जिसमें कानपुर लेन पर 39 और लखनऊ लेन पर 45 जगह शामिल हैं।
NHAI ने इस लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए PNC इंफ्राटेक को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने का नोटिस दिया है और प्रदर्शन सुरक्षा का 2% जुर्माना लगाया है। साथ ही प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर को हटा दिया गया है। इन अधिकारियों को अगले दो साल तक केंद्रीय परियोजनाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है। स्वतंत्र अभियंता कंपनी थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज को भी डिबारमेंट नोटिस जारी हुआ है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| उद्घाटन तिथि | 13 जुलाई, 2026 |
| पहली धंसाव घटना | 26 जुलाई, 2026 (किमी 64) |
| कुल मरम्मत स्थान | 84 जगह |
| जांच टीम | IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ समिति |
| तकनीक का उपयोग | लेजर प्रोफिलोमीटर और AI मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन |
| PNC इंफ्राटेक का दावा | भारी बारिश और जलभराव के कारण नुकसान |
PNC इंफ्राटेक ने अपना बचाव करते हुए कहा कि निर्माण में सभी तकनीकी मानकों का पालन किया गया था और नुकसान केवल भारी बारिश की वजह से हुआ है। कंपनी का दावा है कि केवल 0.5 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है और वे मरम्मत का पूरा खर्च खुद उठाएंगे। फिलहाल NHAI ने मामले की तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं और IIT खड़गपुर की एक टीम धंसाव के कारणों की विस्तृत जांच कर सुधारात्मक उपाय सुझाएगी।