UP के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में 20 दिन में 5 बार धंसी सड़क, NHAI ने की जांच, 3 इंजीनियर हटाए गए
UP/Lucknow: लखनऊ और कानपुर के बीच बना नया एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद विवादों में घिर गया है। महज 20 दिनों के भीतर सड़क के पांच बार धंसने की खबरें सामने आई हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
UP/Lucknow: लखनऊ और कानपुर के बीच बना नया एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद विवादों में घिर गया है। महज 20 दिनों के भीतर सड़क के पांच बार धंसने की खबरें सामने आई हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच के आदेश दिए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। इसे 14 जुलाई को आम जनता के लिए खोल दिया गया था। लेकिन इसके बाद उन्नाव जिले के कुरारी के पास संपर्क मार्ग पर सड़क धंसने की घटनाएं होने लगीं। 3 अगस्त को एक बार फिर सड़क की सतह खराब होने की खबर मिली, जिसके बाद NHAI ने तुरंत एक्शन लिया। जांच पूरी होने तक तीन इंजीनियरों को उनके काम से हटा दिया गया है।
NHAI के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा का कहना है कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि सड़क पांच अलग-अलग जगहों से धंसी है, क्योंकि ज्यादातर नुकसान कुरारी पुल के पास संपर्क मार्ग पर ही हुआ है। पहले केवल 20 मीटर के हिस्से की मरम्मत की गई थी, लेकिन वहां फिर से समस्या आने पर अब पूरे 220 मीटर लंबे रास्ते की मरम्मत करने का फैसला लिया गया है। यह काम दो दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। कुरारी टोल प्लाजा के पास फिलहाल ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।
सड़क की खराब हालत और महंगे टोल की वजह से अब लोग पुराने हाईवे का इस्तेमाल करने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 30 प्रतिशत वाहन पुराने रास्ते पर लौट आए हैं। पहले 26 जुलाई को हुई घटना के बाद भी NHAI ने प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेसिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को हटाकर अगले दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
हालांकि NHAI ने 31 जुलाई को यह स्पष्ट किया था कि सड़क की मुख्य संरचना सुरक्षित है और केवल ऊपरी परत (बिटुमिनस वेयरिंग कोर्स) प्रभावित हुई है। इसे मानसून के दौरान होने वाला रखरखाव बताया गया। वहीं रोड इंजीनियरिंग विशेषज्ञ सुनील गुप्ता का मानना है कि बारिश में सड़कों का धंसना आम है, लेकिन एक एक्सप्रेसवे पर ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्माण के समय मिट्टी की पटाई और रोलर का सही इस्तेमाल जरूरी होता है।
इस पूरे प्रोजेक्ट को बनाने में करीब 4200 से 4700 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसका निर्माण पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने किया था। फिलहाल अधिकारियों द्वारा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की रफ्तार कम करने पर विचार किया जा रहा है, क्योंकि दैनिक वाहनों की संख्या 22-24 हजार से घटकर अब 18-20 हजार रह गई है।