UP में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की हालत खराब, 20 दिन में 5 बार हुई मरम्मत, लोग पुराने हाईवे पर लौटने को मजबूर

UP/Lucknow: कानपुर और लखनऊ के बीच सफर आसान करने के लिए बनाया गया नया एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद विवादों में घिर गया है। महज 20 दिनों के भीतर सड़क की ऊपरी परत खराब होने लगी और अब तक 5 से 6 बार मरम्मत का काम क

UP/Lucknow: कानपुर और लखनऊ के बीच सफर आसान करने के लिए बनाया गया नया एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद विवादों में घिर गया है। महज 20 दिनों के भीतर सड़क की ऊपरी परत खराब होने लगी और अब तक 5 से 6 बार मरम्मत का काम करना पड़ा है। इस वजह से यात्रियों का भरोसा टूट रहा है और बड़ी संख्या में लोग अब पुराने हाईवे का रास्ता चुन रहे हैं।

इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। करीब 4200 से 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट को 14 जुलाई को जनता के लिए खोला गया था। NHAI ने दावा किया था कि इसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ है और अगले 10 साल तक गड्ढे नहीं होंगे, लेकिन हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है।

सड़क की खराबी का सिलसिला 27 जुलाई से शुरू हुआ जब उन्नाव एंट्री पॉइंट के पास सतह खराब मिली। इसके बाद 1 अगस्त तक किमी संख्या 45 पर चौथी बार दरारें आईं और 3 अगस्त को कुरारी के पास संपर्क मार्ग पर फिर से नुकसान देखा गया। 4 अगस्त तक कोरारी खुर्द के पास लखनऊ जाने वाली लेन में 60 मीटर का हिस्सा खराब हो गया।

तारीख जगह/किमी समस्या
27 जुलाई 2026 उन्नाव एंट्री पॉइंट सड़क की ऊपरी परत में खराबी
1 अगस्त 2026 किमी संख्या 45 डामर में चौथी बार दरार
3 अगस्त 2026 कुरारी पुल संपर्क मार्ग 20 मीटर हिस्सा दोबारा खराब हुआ
4 अगस्त 2026 किमी संख्या 64 (कोरारी खुर्द) 60 मीटर हिस्सा खराब

NHAI के अधिकारियों का कहना है कि यह समस्या केवल ऊपरी सतह यानी सरफेस स्लिपेज की है और पुल या नींव पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि, गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद NHAI ने जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में दो स्वतंत्र इंजीनियरों और निर्माण कंपनी PNC Infratech के एक मेंटेनेंस इंजीनियर को काम से हटा दिया गया है।

एक्सप्रेसवे पर लगातार हो रही मरम्मत, बार-बार डायवर्जन और पुराने हाईवे के मुकाबले ज्यादा टोल (₹275 बनाम ₹95) की वजह से लोग परेशान हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अब करीब 30% गाड़ियां वापस पुराने हाईवे पर लौट गई हैं। एक्सप्रेसवे पर चलने वाले वाहनों की संख्या 22-24 हजार से घटकर अब 18-20 हजार रह गई है।