UP में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की खुली पोल, 1 घंटे की बारिश में भरा पानी; NHAI ने कंपनी को दिया नोटिस
UP/Lucknow: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर रविवार को हुई करीब एक घंटे की बारिश ने निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी। सड़क किनारे कई जगहों पर भारी जलभराव हो गया और वाहनों के गुजरने पर पानी कई फीट ऊपर तक उछलता दिखा। इस घटना के
UP/Lucknow: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर रविवार को हुई करीब एक घंटे की बारिश ने निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी। सड़क किनारे कई जगहों पर भारी जलभराव हो गया और वाहनों के गुजरने पर पानी कई फीट ऊपर तक उछलता दिखा। इस घटना के बाद एक्सप्रेसवे के ड्रेनेज सिस्टम और सड़क धंसने की गंभीर समस्या सामने आई है, जिससे यात्रियों को काफी दिक्कतें हुईं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए NHAI ने बड़ी कार्रवाई की है। निर्माण एजेंसी एम/एस पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को ‘नॉन-परफ़ॉर्मर’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। लापरवाही के चलते प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को तुरंत हटा दिया गया है। इन तीनों अधिकारियों पर दो साल तक MoRTH, NHAI और NHIDCL की किसी भी परियोजना में काम करने की रोक लगा दी गई है। साथ ही वर्तमान परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग भेज दिया गया है।
जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर, एक स्वतंत्र प्रयोगशाला और NHAI की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया। शुरुआती जांच में खराब अर्थवर्क और गलत ड्रेनेज लेयर की वजह से पानी जमा होने और सड़क धंसने की बात सामने आई है। जांच में पाया गया कि पानी बाहर निकलने के बजाय सड़क के नीचे जा रहा था, जिससे कई फुट तक नमी मिली है। उन्नाव से लखनऊ लेन पर कई गांवों के पास सड़क धंसने से यातायात को बदलना पड़ा है।
| मुख्य विवरण | जानकारी |
|---|---|
| घटना की तारीख | 9 अगस्त 2026 |
| जांच टीम | IIT खड़गपुर और स्वतंत्र लैब |
| निर्माण एजेंसी | एम/एस पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड |
| किए गए सैंपल | 61 छेद कर 122 सैंपल लिए गए |
| टोल टैक्स | सड़क ठीक होने तक वसूली बंद |
| रिपोर्ट की अवधि | 12 दिनों में आने की उम्मीद |
एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की गहराई से जांच के लिए चार कंपनियों को थर्ड पार्टी सर्वे का काम सौंपा गया है। अब यह सवाल भी उठ रहा है कि जब फरवरी 2026 में पीएनसी को फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया गया था, तो क्या तब सभी तकनीकी मानकों और सुरक्षा जांचों को पूरा किया गया था। फिलहाल आईआईटी खड़गपुर की टीम विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है।