UP में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की हालत खराब, सड़क सुखाने के लिए लगाए गए पेडस्टल पंखे

UP: लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे की हालत उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद खराब हो गई है। करीब 4200 से 4800 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस सड़क पर गड्ढे और जलभराव की समस्या देखी गई है। अब इस सड़क को ठीक करने के लिए

UP: लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे की हालत उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद खराब हो गई है। करीब 4200 से 4800 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस सड़क पर गड्ढे और जलभराव की समस्या देखी गई है। अब इस सड़क को ठीक करने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग इसका मजाक उड़ा रहे हैं।

इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। लेकिन उद्घाटन के महज 13 दिनों के भीतर ही सड़क पर दरारें आने लगीं और कुछ हिस्सों में सड़क धंसने की खबरें आईं। 6 अगस्त तक एक्सप्रेसवे पर करीब 84 अलग-अलग जगहों पर खराबी दर्ज की गई। उन्नाव के कोरारी इलाके में किलोमीटर 64 के पास सड़क की सतह फिसलने की समस्या भी सामने आई।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में देखा गया कि मजदूर सड़क के खराब हिस्सों पर बिछाए गए बिटुमेन को सुखाने के लिए पेडस्टल पंखों का इस्तेमाल कर रहे हैं। निर्माण कंपनी PNC इन्फ्राटेक ने इसका बचाव करते हुए कहा कि बारिश की वजह से सतह पर नमी थी, जिसे हटाने और काम में तेजी लाने के लिए 60 मीटर के दायरे में 10 पंखे लगाए गए थे। इस मामले पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर तंज कसा है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मरम्मत का काम पूरा होने तक टोल वसूली रोक दी गई है और एक आधिकारिक जांच शुरू की गई है। इस लापरवाही के चलते तीन इंजीनियरों और पूर्व परियोजना निदेशक को निलंबित कर दिया गया है। NHAI ने निर्माण कंपनी PNC इन्फ्राटेक लिमिटेड को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने का प्रस्ताव भेजा है, जिससे कंपनी को अगले 2-3 साल तक नई परियोजनाओं में बोली लगाने से रोका जा सकता है। साथ ही कंपनी पर 2% जुर्माने की कार्रवाई भी शुरू हुई है।

सड़क की तकनीकी जांच के लिए IIT खड़गपुर के प्रोफेसर के.एस. रेड्डी की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है। फिलहाल मरम्मत का काम चल रहा है, जिसमें सड़क के कुछ हिस्सों को 2 फीट गहरा खोदकर दोबारा बनाया जा रहा है और जल निकासी के सिस्टम को सुधारा जा रहा है।