Lucknow-Kanpur Expressway में भ्रष्टाचार के आरोप, हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
UP : लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और NHAI को नोटिस जारी कर जवाब
UP : लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और NHAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई एक जनहित याचिका के बाद की गई है, जिसमें सड़क के शुरू होते ही टूटने और गड्ढे होने की बात कही गई है।
अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने यह याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 4,200 से 4,700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच सीबीआई या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की निगरानी में कराई जाए। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने टोल टैक्स की ऊंची दरों पर भी सवाल उठाए हैं और इसे कम करने की मांग की है।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मनीष शुक्ला की बेंच कर रही है। कोर्ट ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और प्रदेश के परिवहन विभाग को निर्देश दिया है कि वे याचिका में लगाए गए आरोपों पर बिंदुवार जवाब दाखिल करें। इस मामले में निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
बता दें कि इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को हुआ था और 14 जुलाई से इसे जनता के लिए खोल दिया गया था। लेकिन उद्घाटन के महज 26 दिनों के भीतर ही सड़क पर 74 जगहों पर गड्ढे नजर आए। 27 जुलाई को तो उन्नाव के कोरारी के पास सड़क का एक हिस्सा 5-7 मीटर तक धंस गया था।
NHAI ने पहले ही इस मामले में PNC इंफ्राटेक के खिलाफ सख्त कदम उठाए थे। कंपनी को गैर-निष्पादक घोषित कर जुर्माना लगाया गया और उसके प्रोजेक्ट मैनेजर व सलाहकारों को हटा दिया गया। सड़क टूटने की असली वजह जानने के लिए IIT खड़गपुर की टीम जांच कर रही है। NHAI ने साफ किया है कि मरम्मत का सारा खर्च निर्माण कंपनी ही उठाएगी और सरकारी खजाने से एक भी रुपया खर्च नहीं होगा।