UP में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

UP: लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि याचिका में उठाए गए सभी सवा

UP: लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि याचिका में उठाए गए सभी सवालों का बिंदुवार जवाब दिया जाए।

यह पूरा मामला स्थानीय वकील मोतीलाल यादव द्वारा दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की बेंच ने 14 अगस्त 2026 को यह आदेश सुनाया। याचिका में कहा गया है कि करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे की हालत उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद खराब हो गई। आरोप है कि चालू होने के मात्र 26 दिनों के भीतर ही 74 अलग-अलग जगहों पर गड्ढे हो गए और सड़क टूटने लगी।

बता दें कि इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। लेकिन उद्घाटन के महज 13वें दिन यानी 26 जुलाई को पहली बार सड़क धंसने की खबर आई थी। इसके बाद 12 अगस्त तक सड़क धंसने का सिलसिला जारी रहा, जिसमें 24 जगहों पर सीपेज और सड़क की ऊपरी परत उखड़ने की बात सामने आई।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे निर्माण कार्य की जांच सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाए। साथ ही एक्सप्रेसवे पर लिए जा रहे टोल टैक्स को बहुत ज्यादा बताते हुए उसे कम करने की अपील की गई है। कोर्ट ने अब भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और यूपी सरकार के परिवहन विभाग से अपना पक्ष रखने को कहा है।

दूसरी तरफ NHAI ने कहा है कि सड़क के खराब हिस्सों की मरम्मत का खर्च ठेकेदार को ही उठाना होगा। सड़क धंसने के तकनीकी कारणों की जांच के लिए IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है। फिलहाल मिट्टी की जांच और नालियों को ठीक करने का काम चल रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण में कहां चूक हुई।