Lucknow-Kanpur Expressway पर एक महीने में ही धंसी सड़कें, NHAI ने टोल वसूली रोकी और कंपनी पर लगाया बैन
UP: लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे की हालत उद्घाटन के एक महीने के अंदर ही खराब हो गई है। सड़क कई जगहों से धंस गई है और पैचवर्क उखड़ रहा है, जिससे सफर करने वालों के लिए खतरा बढ़ गया है। निर्माण की इतनी बड़ी खामि
UP: लखनऊ और कानपुर के बीच बने नए एक्सप्रेसवे की हालत उद्घाटन के एक महीने के अंदर ही खराब हो गई है। सड़क कई जगहों से धंस गई है और पैचवर्क उखड़ रहा है, जिससे सफर करने वालों के लिए खतरा बढ़ गया है। निर्माण की इतनी बड़ी खामियां सामने आने के बाद अब NHAI ने सख्त कदम उठाए हैं।
यह एक्सप्रेसवे 13 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शुरू हुआ था। लेकिन 14 जुलाई से 10 अगस्त के बीच करीब 40 बार सड़क धंसने और पैचवर्क निकलने की खबरें आईं। 10 अगस्त को ही 14 जगहों पर सड़क धंसी थी और 11 अगस्त को तीन और जगहों पर यह समस्या देखी गई। कुल 80 से ज्यादा जगहों पर मरम्मत का काम किया गया है और कई जगहों पर काम अभी भी चल रहा है।
एक्सप्रेसवे पर सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि डिवाइडर, पुलिया की दीवारें और हर दो किलोमीटर पर लगे इमरजेंसी कॉलिंग बूथ भी खराब मिले हैं। खासकर पुल और सड़क के मिलन वाले हिस्सों (expansion joints) पर सड़क धंसने से गाड़ियां उछल रही हैं। जानकारों का कहना है कि मिट्टी की ठीक से कुटाई नहीं हुई और बारिश का पानी अंदर रिसने से यह समस्या आई है।
इस लापरवाही पर एक्शन लेते हुए NHAI ने टोल वसूली पर रोक लगा दी है। इसका जो नुकसान होगा, वह बनाने वाली कंपनी PNC Infratech Ltd से वसूला जाएगा। NHAI ने कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे वह भविष्य में टेंडर नहीं ले पाएगी। कंपनी पर 2 प्रतिशत पेनल्टी लगाने और जिम्मेदार इंजीनियरों को 3 साल तक बैन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
| मुख्य विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल लागत | 4,200 करोड़ रुपये |
| निर्माण कंपनी | PNC Infratech Ltd |
| कुल लंबाई | 63 किलोमीटर (उन्नाव से लखनऊ) |
| मरम्मत का खर्च | करीब 3 करोड़ रुपये (कंपनी भरेगी) |
| जांच टीम | IIT Kharagpur के प्रोफेसर के.एस. रेड्डी के नेतृत्व में |
| कंपनी पर एक्शन | NHAI प्रोजेक्ट्स से 2 साल का बैन |
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि शुरुआती खराबी को 6 घंटे में ठीक कर ट्रैफिक चालू कर दिया गया था। अब IIT खड़गपुर की टीम जांच कर रही है और 12 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। इस एक्सप्रेसवे का 15 साल का डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड है, जिसका मतलब है कि इस दौरान रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होगी और सरकार पर कोई खर्च नहीं आएगा। इस मामले में तीन अधिकारियों को हटा दिया गया है।