Lucknow के जानकीपुरम-II में बदहाल सड़कें और कूड़े के ढेर, स्थानीय भाजपाई बोले- वोट मांगने में डर

Lucknow: राजधानी के जानकीपुरम-II वार्ड में बुनियादी सुविधाओं की हालत इतनी खराब हो गई है कि लोग अब सड़कों पर चलने से डर रहे हैं। सीवर और निर्माण कार्यों के नाम पर महीनों पहले सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया, जिससे आवागमन मु

Lucknow: राजधानी के जानकीपुरम-II वार्ड में बुनियादी सुविधाओं की हालत इतनी खराब हो गई है कि लोग अब सड़कों पर चलने से डर रहे हैं। सीवर और निर्माण कार्यों के नाम पर महीनों पहले सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है और लोग गड्ढों में गिरकर घायल हो रहे हैं। हालात यह हैं कि स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता भी अब जनता के बीच जाकर वोट मांगने में कतरा रहे हैं।

जानकीपुरम-II और जानकीपुरम तृतीय वार्ड में गंदगी और जलभराव की समस्या चरम पर है। लखनऊ यूनिवर्सिटी न्यू कैंपस के पास मुख्य सड़क पर खुले में कूड़ा फेंका जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में बदबू फैली हुई है और रास्ता संकरा हो गया है। रसूलपुर कायस्थ और शुक्ला चौराहा के पास की सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। स्ट्रीट लाइट न होने की वजह से रात के समय दुर्घटनाओं और जहरीले जीवों का खतरा बढ़ गया है, जिससे करीब 6 से 7 हजार लोग रोजाना परेशान हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और नगर निगम की लापरवाही सामने आ रही है। LDA ने जानकीपुरम विस्तार में एक तालाब के सौंदर्यीकरण पर करीब 3 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन वहां पानी की जगह लंबी घास उग आई है और काम अधूरा छोड़ दिया गया है। साथ ही, ग्रीन बेल्ट पर अवैध मुर्गा मंडी और लकड़ी बाजार चलने से अतिक्रमण और गंदगी बढ़ गई है। पानी की टंकियां जर्जर होकर टपक रही हैं और पार्कों की हालत भी खस्ता है।

सरकारी कागजों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिख रहा है। फरवरी 2026 में नगर निगम के 23 अधिकारियों पर 300 से ज्यादा शिकायतों का फर्जी निस्तारण करने के आरोप लगे थे। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने इस पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। इससे पहले महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी चेतावनी दी थी कि केवल फीडबैक रिपोर्ट में समाधान दिखाना काफी नहीं है और लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। आरटीआई के जवाब में LDA ने माना कि जानकीपुरम विस्तार में कूड़ादान नहीं बनाए गए हैं और कूड़ा सड़क किनारे इकट्ठा कर एजेंसियों से उठवाया जाता है, लेकिन भविष्य की कोई ठोस योजना नहीं बताई गई।