UP: लखनऊ में बन रही IT City अब और बड़ी होने जा रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस योजना के दायरे को बढ़ाने का फैसला किया है ताकि उन जमीनों को भी शामिल किया जा सके जो पहले अधिग्रहण की प्रक्रिया में छूट गई थीं। करीब
UP: लखनऊ में बन रही IT City अब और बड़ी होने जा रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस योजना के दायरे को बढ़ाने का फैसला किया है ताकि उन जमीनों को भी शामिल किया जा सके जो पहले अधिग्रहण की प्रक्रिया में छूट गई थीं। करीब 3490 एकड़ में फैलने वाली इस बड़ी परियोजना से शहर के विकास को रफ्तार मिलेगी और लगभग 2 लाख परिवारों को घर मिलने की उम्मीद है।
IT City के विस्तार में कौन सी जमीनें होंगी शामिल
LDA उन सभी गाटों को चिह्नित कर रहा है जो पहले अधिग्रहण से बाहर रह गए थे। इसमें सुशांत गोल्फ सिटी के लिए आरक्षित कुछ जमीनों को भी जोड़ा जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि अगर सीमा अधूरी रहती है, तो भविष्य में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में दिक्कत आ सकती है। इस विस्तार के लिए सोनई कंजेहरा, पहाड़नगर टिकरिया, परेहटा और सिकंदरपुर अमोलिया जैसे गांवों की सटी हुई जमीनों को शामिल करने की तैयारी है।
लैंड पूलिंग पॉलिसी और बजट की क्या है स्थिति
यह पूरी परियोजना लैंड पूलिंग मॉडल पर आधारित है। इसके तहत जो किसान अपनी जमीन देंगे, उन्हें विकसित भूखंडों का 25% हिस्सा वापस मिलेगा। वहीं 10 एकड़ से ज्यादा जमीन देने वालों को 50% विकसित जमीन दी जाएगी। इस योजना के लिए 187वीं LDA बोर्ड बैठक में IT City और Wellness City जैसी परियोजनाओं के लिए 1,600 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है।
परियोजना से जुड़ी अन्य जरूरी बातें
IT City को 28 फरवरी 2026 को लॉन्च किया गया था। प्रशासन ने 15 मई 2026 को धारा-11 लागू कर दी है, जिससे अब कलेक्टर की अनुमति के बिना इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री नहीं हो सकेगी। साथ ही LDA ने निर्देश दिए हैं कि योजना के बीच आने वाले तालाबों और झीलों को अधिग्रहण से बाहर रखा जाएगा ताकि उनका संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
IT City योजना के विस्तार से कितने लोगों को फायदा होगा
LDA के इस विस्तार से करीब 2 लाख परिवारों को आवासीय सुविधा मिलने की संभावना है और शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।
लैंड पूलिंग पॉलिसी में किसानों को क्या लाभ मिलेगा
जमीन देने वाले किसानों को विकसित भूखंडों का 25% हिस्सा वापस मिलेगा, जबकि 10 एकड़ से अधिक जमीन देने वालों को 50% विकसित भूमि दी जाएगी।