Lucknow में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 119 हिरासत में, 250 करोड़ की धोखाधड़ी
Lucknow: राजधानी के गोमती नगर इलाके में पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह को पकड़ा है। यह कॉल सेंटर रात के अंधेरे में चलता था और सुबह होते ही सभी लोग वहां से गायब हो जाते थे। पुलिस ने समिट बिल्डिंग की 1
Lucknow: राजधानी के गोमती नगर इलाके में पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह को पकड़ा है। यह कॉल सेंटर रात के अंधेरे में चलता था और सुबह होते ही सभी लोग वहां से गायब हो जाते थे। पुलिस ने समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर छापेमारी कर इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके जरिए करोड़ों रुपये की ठगी की गई थी।
पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर के निर्देश पर साइबर सेल और साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने मंगलवार रात को यह ऑपरेशन चलाया। एडीसीपी (क्राइम) किरण यादव ने बताया कि यह गिरोह ‘सोलारिस सॉल्यूशन’ के नाम से चल रहा था। ठग खुद को FBI अधिकारी बताकर अमेरिका और कनाडा के लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाते थे और उनसे पैसे वसूलते थे। इस काम के लिए डॉलर ऐप और IBM सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता था।
इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड अहमदाबाद का विनीत शर्मा बताया जा रहा है, जिसकी कंपनी की नेटवर्थ 500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। पुलिस ने इस मामले में दो ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को भी हिरासत में लिया है। ठगी का पैसा अमेरिका, रूस और चीन से हवाला के जरिए भारत आता था, जिसे बाद में क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर बांटा जाता था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में सामान जब्त किया है और कई लोगों को पकड़ा है। पूरी कार्रवाई का ब्यौरा नीचे दी गई टेबल में है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल हिरासत में लिए गए लोग | 119 (92 पुरुष और 27 महिलाएं) |
| अनुमानित ठगी की राशि | 250 करोड़ रुपये से अधिक |
| जब्त लैपटॉप | 100 |
| जब्त मोबाइल फोन | 178 |
| कॉल सेंटर का नाम | सोलारिस सॉल्यूशन |
| ऑपरेशन का समय | जनवरी 2025 से अब तक |
| कर्मचारियों का वेतन | 30,000 से 40,000 रुपये + 10% कमीशन |
संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) बबलू कुमार ने बताया कि जब्त किए गए सभी गैजेट्स और कागजातों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के और कितने सदस्य हैं और पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क लखनऊ के अलावा पांच अन्य राज्यों में भी फैला हुआ था।