Lucknow के इंदिरा नगर जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान शुरू, आचार्य सुबल सागर ने बताया भक्ति का महत्व
Lucknow: राजधानी के इंदिरा नगर स्थित जैन मंदिर में इन दिनों धार्मिक माहौल है। यहाँ आचार्य सुबल सागर महाराज के सानिध्य में आठ दिवसीय 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। 22 जुलाई को इस अनुष्ठान का दूसरा द
Lucknow: राजधानी के इंदिरा नगर स्थित जैन मंदिर में इन दिनों धार्मिक माहौल है। यहाँ आचार्य सुबल सागर महाराज के सानिध्य में आठ दिवसीय 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। 22 जुलाई को इस अनुष्ठान का दूसरा दिन था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और महाराज जी के प्रवचनों को सुना।
प्रवचन के दौरान आचार्य सुबल सागर महाराज ने भक्तों को बताया कि भगवान आठों कर्मों से मुक्त होते हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जिन लोगों के ग्रह कमजोर हैं, उन्हें केवल भगवान की भक्ति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी समझाया कि सिद्धों की आराधना करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और रुके हुए काम अपने आप बनने लगते हैं। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को “ॐ ह्रीं अरहम अ सि उ अ सा नमः” मंत्र के सवा लाख जाप का संकल्प भी दिलाया गया।
जैन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने जानकारी दी कि इस आठ दिवसीय आयोजन में 200 दंपति संकल्प लेकर शामिल हुए हैं। इसके अलावा 500 से ज्यादा महिला और पुरुष श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा में भाग ले रहे हैं। इस विधान की शुरुआत भव्य घट यात्रा, ध्वजारोहण, अभिषेक और शांतिधारा के साथ हुई थी।
आयोजन की अन्य मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
| विवरण | नाम/जानकारी |
|---|---|
| प्रथम घट कलश | श्रीमती आकांक्षा जैन |
| ध्वजारोहण | महावीर गंगवाल |
| सौधर्म इंद्र | अक्षय जैन |
| धनकुबेर | आकाश जैन |
| शांतिधारा | पी.के. जैन (अध्यक्ष) |
| विधि-विधान संचालन | प्रतिष्ठाचार्य आशीष जी एवं पुण्यांश जी |
बता दें कि आचार्य सुबल सागर महाराज इस साल अपना चातुर्मास लखनऊ में ही करेंगे, जिससे स्थानीय जैन समाज में काफी उत्साह है।