UP: लखनऊ के फैजुल्लागंज वार्ड नंबर 73 के निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को पांच महीने बाद भी शपथ नहीं दिलाई गई है। इस देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अब इस मामले में जवाब देने
UP: लखनऊ के फैजुल्लागंज वार्ड नंबर 73 के निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को पांच महीने बाद भी शपथ नहीं दिलाई गई है। इस देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अब इस मामले में जवाब देने के लिए लखनऊ के मेयर, नगर निगम कमिश्नर और राज्य सरकार को तलब किया है।
शपथ दिलाने में देरी क्यों हुई और क्या है पूरा मामला?
यह मामला दिसंबर 2019, 2025 से शुरू हुआ जब कोर्ट ने पूर्व पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला के चुनाव को रद्द कर दिया था। आरोप था कि शुक्ला ने अपने हलफनामे में पहली पत्नी और संपत्ति की जानकारी छिपाई थी। इसके बाद कोर्ट ने ललित किशोर तिवारी को सही निर्वाचित पार्षद माना। मार्च 2026 में शहरी विकास विभाग ने भी प्रशासन को शपथ दिलाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद मेयर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ नहीं दिलाई।
हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
हाईकोर्ट ने साफ किया कि मेयर को कोर्ट के आदेशों और सरकारी निर्देशों का पालन करना ही होगा। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई पहली अपील लंबित है, तो उसकी वजह से शपथ दिलाने की प्रक्रिया को नहीं रोका जा सकता। अदालत ने मेयर के इस रवैये को कानून के खिलाफ माना है। कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम कमिश्नर से भी इस मामले में जवाब मांगा है और काउंटर एफिडेविट दाखिल करने को कहा है।
नगर निगम अधिनियम के नियम क्या कहते हैं?
नगर निगम अधिनियम के सेक्शन 85 के मुताबिक, हर निर्वाचित पार्षद या मेयर को पद संभालने से पहले शपथ लेनी जरूरी है। नियम यह है कि डिविजनल कमिश्नर या डीएम मेयर को शपथ दिलाते हैं, और फिर मेयर पार्षदों को शपथ दिलाते हैं। अगर कोई पार्षद या मेयर अपने कार्यकाल के शुरू होने के तीन महीने के भीतर या निगम की पहली तीन बैठकों में शपथ नहीं लेता, तो उनका पद खाली घोषित किया जा सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ललित किशोर तिवारी को अब तक शपथ क्यों नहीं दिलाई गई?
ललित तिवारी को दिसंबर 2025 में निर्वाचित घोषित किया गया था, लेकिन मेयर और नगर निगम प्रशासन द्वारा पांच महीने बाद भी शपथ दिलाने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है।
पूर्व पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला का चुनाव क्यों रद्द हुआ?
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने प्रदीप कुमार शुक्ला का चुनाव रद्द कर दिया था क्योंकि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी पहली पत्नी और संपत्ति की जानकारी नहीं दी थी।