UP में जमीन विवाद में पुलिस नहीं दिला सकती कब्जा, लखनऊ हाईकोर्ट ने तय की सीमा

UP : जमीन और मकान के विवादों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि निजी जमीन के मालिकाना हक या कब्जे के झगड़ों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दखल नहीं दे सकते। अब

UP : जमीन और मकान के विवादों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि निजी जमीन के मालिकाना हक या कब्जे के झगड़ों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दखल नहीं दे सकते। अब पुलिस किसी भी पक्ष को जबरन कब्जा दिलाने या दूसरे पक्ष को बेदखल करने की कार्रवाई नहीं करेगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने 5 अगस्त 2026 को दिया। यह मामला 85 साल के बुजुर्ग इंद्रपति और एक अन्य याचिकाकर्ता की अर्जी पर आया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने बिना किसी अदालती आदेश के उनकी जमीन के कब्जे में हस्तक्षेप किया था। कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि संपत्ति के मालिकाना हक और सीमाओं से जुड़े विवादों का फैसला केवल सिविल अदालतें ही कर सकती हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और शांति स्थापित करना है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) और पुराने दंड प्रक्रिया संहिता के तहत पुलिस केवल सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए काम करेगी। कोर्ट ने यूपी पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा 11 मार्च 2023 को जारी उस परिपत्र का भी जिक्र किया, जिसमें पहले ही कहा गया था कि पुलिस निजी पार्टियों के बीच मालिकाना हक का फैसला नहीं करेगी।

नियम के मुताबिक, अगर जमीन या संपत्ति से जुड़ी कोई शिकायत आती है, तो पुलिस को उसे तुरंत संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट या राजस्व अधिकारियों के पास भेजना होगा। पुलिसकर्मी किसी भी व्यक्ति को सिविल विवाद में बेदखल नहीं कर सकते। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर कोई अधिकारी इन निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही भी की जा सकती है।