Lucknow: तुलसियानी कंस्ट्रक्शन के खिलाफ ED का केस रद्द, हाईकोर्ट ने कहा- दीवानी विवाद को आपराधिक रंग न दें

UP/Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने तुलसियानी कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स लिमिटेड और उसके निदेशकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के मुकदमे को पूरी तरह रद्द

UP/Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने तुलसियानी कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स लिमिटेड और उसके निदेशकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के मुकदमे को पूरी तरह रद्द कर दिया है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने साफ किया कि पैसों के लेन-देन या बिजनेस से जुड़े दीवानी विवादों को आपराधिक मामला बनाकर PMLA के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती।

यह पूरा मामला पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शिकायत से शुरू हुआ था। बैंक ने 24 सितंबर 2022 को करीब 4.63 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी। आरोप था कि कुछ होम लोन की रकम को व्यक्तिगत फायदे के लिए दूसरे काम में लगाया गया। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि ED ने इस मामले में कथित अपराध की आय को बढ़ा-चढ़ाकर 9.948 करोड़ रुपये कर दिया था, जिसमें उन बैंक ऋणों को भी जोड़ लिया गया था जिनका निपटारा पहले ही हो चुका था।

अदालत ने ED की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को समन करना एक गंभीर मामला है और इसके लिए ठोस कारण होने चाहिए। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट टूटने या दीवानी विवाद होने पर उसे आपराधिक केस में बदलना सही नहीं है।

मुख्य विवरण जानकारी
निर्णय की तारीख 2 जुलाई 2026
न्यायाधीश जस्टिस सुभाष विद्यार्थी
आवेदक तुलसियानी कंस्ट्रक्शन, महेश कुमार और अनिल कुमार तुलसियानी
विपक्षी पक्ष प्रवर्तन निदेशालय (ED)
मूल शिकायतकर्ता पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
रद्द किया गया आदेश 30 जनवरी 2026 का समन और संज्ञान आदेश

कोर्ट ने यह भी पाया कि ED ने उन संपत्तियों को भी कुर्क कर लिया था जिनका इस केस से कोई लेना-देना नहीं था। उदाहरण के लिए, 2012 में खरीदे गए एक फ्लैट को कुर्क किया गया, जबकि कथित अपराध 2022 का बताया गया। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पहले जारी किए गए कुर्की आदेश निष्प्रभावी हो जाएंगे।