UP: गर्भावस्था के कारण नहीं छीनी जा सकती सरकारी नौकरी, Lucknow हाईकोर्ट ने UPSSSC को दिए दोबारा PET कराने के निर्देश
UP : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि गर्भावस्था किसी महिला अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से बाहर करने का आधार नहीं बन सकती। कोर्ट ने साफ किया कि मातृत्व एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसके
UP : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि गर्भावस्था किसी महिला अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से बाहर करने का आधार नहीं बन सकती। कोर्ट ने साफ किया कि मातृत्व एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसके कारण किसी महिला को भर्ती प्रक्रिया से रोकना उसके रोजगार और प्रजनन अधिकारों का उल्लंघन है।
यह पूरा मामला कोमल जायसवाल नाम की महिला अभ्यर्थी से जुड़ा है, जिन्होंने वन रक्षक और वन्यजीव रक्षक के पदों के लिए आवेदन किया था। इस भर्ती का विज्ञापन 12 सितंबर 2023 को निकला था और लिखित परीक्षा नवंबर 2025 में हुई थी। कोमल की शादी नवंबर 2023 में हुई और मई 2025 में वह गर्भवती हो गईं। जब फरवरी 2026 में शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) की बारी आई, तो उन्होंने गर्भावस्था के कारण इसे स्थगित करने की मांग की थी।
UPSSSC ने वन रक्षक और वन्यजीव रक्षक सेवा नियम 2015 का हवाला देते हुए उनकी मांग खारिज कर दी थी और कहा था कि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने इस दलील को नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि नियमों में किसी चीज का जिक्र न होना उसे पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं कर देता।
न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि विज्ञापन और लिखित परीक्षा के बीच दो साल से ज्यादा का समय था, इस दौरान शादी और गर्भधारण होना एक सामान्य बात है। आयोग को इस स्थिति के प्रति संवेदनशील होना चाहिए था। अदालत ने माना कि अगर महिला को बच्चा पैदा करने या नौकरी में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह गलत है।
हाईकोर्ट ने अब UPSSSC को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर कोमल जायसवाल के लिए दोबारा शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) आयोजित करे। साथ ही, ओबीसी महिला वर्ग में एक पद उनके परिणाम आने तक आरक्षित रखने को कहा गया है। यदि वह परीक्षा पास कर लेती हैं, तो उन्हें उसी तारीख से लाभ मिलेगा जिस दिन उनकी श्रेणी के कम रैंक वाले उम्मीदवार को नियुक्ति मिली थी।