UP: लखनऊ के इकाना स्टेडियम के आसपास फैली गंदगी और बढ़ते प्रदूषण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत कई अधिकारियों को इस अव्यवस्था को ठीक करने
UP: लखनऊ के इकाना स्टेडियम के आसपास फैली गंदगी और बढ़ते प्रदूषण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत कई अधिकारियों को इस अव्यवस्था को ठीक करने के निर्देश दिए हैं। यह पूरा मामला एक जनहित याचिका के बाद सामने आया है, जिसमें स्टेडियम के पास पर्यावरण को होने वाले नुकसान की बात कही गई है।
स्टेडियम के पास क्या है समस्या और कोर्ट ने क्या कहा?
सामाजिक कार्यकर्ता बृजभूषण दुबे ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें बताया गया कि इकाना स्टेडियम से महज 400 मीटर की दूरी पर भारी मात्रा में कूड़ा फेंका जा रहा है। साथ ही एक सीवेज नाला सीधे गोमती नदी में गिर रहा है। कोर्ट ने चिंता जताई कि आईपीएल मैचों के दौरान यह प्रदूषण आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है। कोर्ट ने 12 मई को सुनवाई के दौरान पार्कों और खेल मैदानों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई और अधिकारियों से जवाब मांगा।
किन अधिकारियों और विभागों की जिम्मेदारी तय हुई?
कोर्ट ने इस समस्या को सुलझाने के लिए कई विभागों को जवाबदेही तय की है। इनमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राज्य सरकार, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB), लखनऊ के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और जल निगम शामिल हैं। इसके अलावा लखनऊ क्रिकेट एसोसिएशन और बीसीसीआई को भी नोटिस जारी किया गया था। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान और खुली जगह संरक्षण एवं विनियमन अधिनियम-1975 की धारा-6 का हवाला देते हुए कहा कि खेल मैदानों का इस्तेमाल सिर्फ उनके तय मकसद के लिए ही होना चाहिए।
ध्वनि प्रदूषण और अन्य नियमों पर सख्ती
पर्यावरण के साथ-साथ कोर्ट ने शोर-शराबे पर भी ध्यान दिया है। स्टेडियम और आसपास के इलाकों में होने वाली शादियों और अन्य आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण को रोकने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने साफ किया कि रात 10 बजे के बाद तेज आवाज और तय सीमा से ज्यादा शोर करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि स्थानीय लोगों को परेशानी न हो।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इकाना स्टेडियम के पास प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है?
स्टेडियम से 400 मीटर की दूरी पर कूड़े का ढेर लगना और एक सीवेज नाले का सीधे गोमती नदी में गिरना मुख्य कारण है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य को खतरा है।
हाईकोर्ट ने किन विभागों को निर्देश दिए हैं?
कोर्ट ने यूपी सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और जल निगम को निवारक कार्यों का विवरण देने और सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।