Lucknow में वकीलों के 72 अवैध चैंबर हटेंगे, हाईकोर्ट ने हड़ताल को बताया आपराधिक अवमानना
Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शहर में वकीलों द्वारा बनाए गए 72 अवैध चैंबरों को गिराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, कोर्ट ने वकीलों की ह
Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शहर में वकीलों द्वारा बनाए गए 72 अवैध चैंबरों को गिराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, कोर्ट ने वकीलों की हड़ताल को आपराधिक अवमानना करार देते हुए कड़ी चेतावनी जारी की है।
यह पूरा मामला क्रिमिनल रिट-पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन नंबर 4/2026 से जुड़ा है। विवाद लखनऊ के स्वास्थ्य भवन के पास चकबस्त चौराहे पर सार्वजनिक जमीन और रास्तों पर किए गए अवैध कब्जों को लेकर है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने लखनऊ नगर निगम (LMC) को निर्देश दिया है कि वह सभी अतिक्रमणकारियों को एक हफ्ते के भीतर नए लिखित नोटिस जारी करे। इससे उन्हें अपनी जगह खाली करने या कब्जे का कानूनी सबूत पेश करने का आखिरी मौका मिलेगा।
कोर्ट ने सुझाव दिया है कि विध्वंस का काम रविवार को किया जाना चाहिए ताकि कोर्ट के कामकाज में कोई रुकावट न आए। पुलिस आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त को आदेश दिया गया है कि वे अभियान के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आपस में तालमेल बिठाएं। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस कार्रवाई में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
इससे पहले 4 अगस्त को नगर निगम के वकील ने बताया था कि 100 से ज्यादा अवैध चैंबर हटाए जा चुके हैं, लेकिन 72 चिह्नित जगहों में से केवल 14 ही हटाए जा सके क्योंकि वहां वकीलों ने विरोध किया था। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता एच.जी.एस. परिहार ने कोर्ट में कहा कि वे अवैध कब्जाधारियों का बचाव नहीं कर सकते और गैर-कानूनी निर्माणों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने वकीलों और बार एसोसिएशनों को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि न्यायिक कार्यवाही को रोकना या सार्वजनिक रास्तों को बंद करना गलत है। कोर्ट के मुताबिक, काम से विरत रहना सीधे तौर पर आपराधिक अवमानना है। बता दें कि मई 2026 में भी बुलडोजर कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद वकीलों ने प्रदर्शन किया था और जून में कोर्ट ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।