UP : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी टेंडर में कोई ऐसी तकनीकी कमी है जिसे सुधारा जा सकता है, तो सिर्फ उस आधार पर पूरी बोली को खारिज नहीं
UP : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी टेंडर में कोई ऐसी तकनीकी कमी है जिसे सुधारा जा सकता है, तो सिर्फ उस आधार पर पूरी बोली को खारिज नहीं किया जाएगा। यह फैसला कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड को बड़ी राहत देने वाला है, जिसकी तकनीकी बोली को उत्तर पूर्व रेलवे (NER) ने रिजेक्ट कर दिया था।
कोंकण रेलवे को हाईकोर्ट से क्या राहत मिली
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अभधेश कुमार चौधरी की बेंच ने उत्तर पूर्व रेलवे की कार्रवाई को गलत बताया। मामला रेलवे विद्युतीकरण प्रोजेक्ट के टेंडर से जुड़ा था। कोंकण रेलवे की बोली 19 मई 2026 को यह कहकर खारिज कर दी गई थी कि वह शर्तों को पूरा नहीं करती। बाद में पता चला कि बैंक गारंटी के स्टांप पेपर पर शुल्क कम जमा था, जिसे कोर्ट ने एक सुधार योग्य तकनीकी खामी माना है।
कोर्ट ने रेलवे प्रशासन को क्या निर्देश दिए
अदालत ने पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर देते हुए सरकारी संस्थाओं को निर्देश दिया है कि उनके फैसले मनमाने नहीं होने चाहिए। कोर्ट ने निम्नलिखित आदेश जारी किए हैं:
- कोंकण रेलवे को 3 जून 2026 तक स्टांप ड्यूटी की कमी को पूरा करने का मौका दिया गया है।
- उत्तर पूर्व रेलवे द्वारा पहले से तैयार की गई वित्तीय बोलियों की टेबुलेशन को रद्द कर दिया गया है।
- अब सभी पात्र निविदाकारों की वित्तीय बोलियों पर नए सिरे से विचार किया जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों है जरूरी
कोर्ट ने टिप्पणी की कि शुरुआती रिजेक्शन लेटर में कारणों का जिक्र नहीं था और बाद में नए कारण जोड़ना कानूनन सही नहीं है। सरकारी टेंडर में सभी कंपनियों को समान अवसर मिलना चाहिए। अगर कोई छोटी गलती है जिसे ठीक किया जा सकता है, तो कंपनी को बाहर करने के बजाय उसे सुधारने का मौका देना चाहिए ताकि सही और पारदर्शी प्रक्रिया पूरी हो सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
हाईकोर्ट ने टेंडर रद्द करने के बारे में क्या कहा है
कोर्ट ने कहा है कि स्टांप ड्यूटी की कमी जैसी सुधार योग्य तकनीकी खामियों के आधार पर किसी बोलीदाता को टेंडर प्रक्रिया से बाहर करना उचित नहीं है।
कोंकण रेलवे को अपनी कमी सुधारने के लिए कितना समय मिला है
अदालत ने कोंकण रेलवे को 3 जून 2026 तक स्टांप ड्यूटी की कमी को पूरा करने का निर्देश दिया है।