UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर विभाग ने किसी कर्मचारी की सेवा को मान्य कर लिया है, तो उसे सिर्फ नियमितीकरण (Regularizatio
UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर विभाग ने किसी कर्मचारी की सेवा को मान्य कर लिया है, तो उसे सिर्फ नियमितीकरण (Regularization) न होने के आधार पर प्रमोशन से नहीं रोका जा सकता। यह आदेश उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है जो सालों से अपनी वरिष्ठता के बावजूद पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे।
प्रमोशन रोकने पर कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की बेंच ने राज्य सरकार की दो विशेष अपीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि 40 साल की सेवा के बाद किसी कर्मचारी को प्रमोशन से वंचित रखना गलत है। अदालत ने यह भी कहा कि अगर जूनियर कर्मचारियों को प्रमोट कर दिया गया है और सीनियर को नजरअंदाज किया गया है, तो यह भेदभावपूर्ण रवैया है। कोर्ट के अनुसार, यदि नियुक्ति नियमों के हिसाब से हुई है और सेवा लगातार रही है, तो तदर्थ (ad-hoc) सेवा को प्रमोशन के लिए गिना जाना चाहिए।
अनियमित और गैर-कानूनी नियुक्ति में क्या अंतर है?
सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनियमित नियुक्ति और गैर-कानूनी नियुक्ति दो अलग चीजें हैं। अगर किसी कर्मचारी की भर्ती संवैधानिक योजना और नियमों के तहत हुई है, तो उसे अनियमित माना जा सकता है, लेकिन गैर-कानूनी नहीं। ऐसे मामलों में, यदि बाद में नियमितीकरण होता है, तो तदर्थ अवधि को भी नियमित सेवा के साथ जोड़कर प्रमोशन की पात्रता तय करनी होगी। इससे उन सीनियर कर्मचारियों को फायदा मिलेगा जिन्हें उनके जूनियर से बाद में प्रमोट किया गया था।
UP सरकार ने प्रमोशन प्रक्रिया में क्या बदलाव किए?
कर्मचारियों की सुविधा के लिए योगी सरकार ने चयन वर्ष की परिभाषा बदल दी है। अब चयन वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक होगा, जो पहले 1 जुलाई से 30 जून तक था। इस बदलाव से उन लाखों कर्मचारियों को लाभ मिलेगा जो साल के अंत में रिटायर होने के कारण सेवा अवधि पूरी नहीं कर पाते थे और प्रमोशन से चूक जाते थे। साथ ही, अब विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें मानव संपदा पोर्टल के जरिए डिजिटल तरीके से होंगी ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध रहे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या नियमितीकरण न होने पर भी प्रमोशन मिल सकता है?
हाँ, लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार यदि विभाग ने कर्मचारी की सेवा को वैध मान लिया है, तो केवल नियमितीकरण न होने के आधार पर प्रमोशन नहीं रोका जा सकता।
UP सरकार ने चयन वर्ष (Selection Year) में क्या बदलाव किया है?
अब चयन वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक माना जाएगा, जिससे जुलाई से दिसंबर के बीच रिटायर होने वाले कर्मचारियों को प्रमोशन का पूरा लाभ मिल सकेगा।