UP में गन्ना किसानों के ब्याज भुगतान पर हाईकोर्ट सख्त, 2021 के बाद वाले सभी गन्ना आयुक्तों के नाम तलब
Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गन्ना किसानों के बकाया ब्याज भुगतान में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले को अपने आदेश की अवहेलना और अवमानना का प्राथमिक मामला माना है। इसी वजह से न्यायालय ने
Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गन्ना किसानों के बकाया ब्याज भुगतान में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले को अपने आदेश की अवहेलना और अवमानना का प्राथमिक मामला माना है। इसी वजह से न्यायालय ने 2 दिसंबर 2021 के बाद पद पर रहे सभी गन्ना आयुक्तों के नाम मांगे हैं।
यह पूरा मामला किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी.एम. सिंह द्वारा वर्ष 2006 में दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह गन्ना किसानों के भुगतान से जुड़ा पूरा और सटीक डेटा उपलब्ध कराए।
गन्ना नियंत्रण आदेश के मुताबिक चीनी मिलों को गन्ने की कीमत 14 दिनों के भीतर चुकानी होती है। अगर इसमें देरी होती है, तो किसानों को 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। कोर्ट ने 1 मई 2024 को वर्ष 1996-97 से अब तक का पूरा रिकॉर्ड मांगा था, जिसमें समय पर भुगतान और ब्याज का विवरण होना था। लेकिन 16 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि सरकार का हलफनामा असंतोषजनक था और सरकार जानकारी देने से बच रही थी।
कोर्ट की नाराजगी इस बात को लेकर है कि स्पष्ट निर्देशों के बाद भी सही ब्यौरा नहीं दिया गया। इसी कारण 24 जुलाई 2026 को गन्ना आयुक्त को अगली सुनवाई पर खुद अदालत में पेश होकर जवाब देने को कहा गया। 3 अगस्त 2026 की सुनवाई में यह स्पष्ट करना था कि 2021 के फैसले के बाद जारी वसूली प्रमाणपत्रों में 15 प्रतिशत ब्याज जोड़ा गया है या नहीं।
दूसरी तरफ चीनी मिल संघ ने दलील दी है कि अगर पूरा ब्याज देने का आदेश हुआ तो मिलों पर हजारों करोड़ का बोझ बढ़ जाएगा, जिससे कई मिलें बंद हो सकती हैं। वहीं 5 अगस्त 2026 को भारतीय किसान यूनियन (भानु) के प्रतिनिधिमंडल ने भी लखनऊ में मंत्रियों से मिलकर केसर शुगर मिल के 182.30 करोड़ रुपये के बकाये समेत अन्य मुद्दे उठाए हैं।