UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए 15 साल की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को 22 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने इस मामले में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के गांधी मेमो
UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए 15 साल की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को 22 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने इस मामले में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के गांधी मेमोरियल एंड एसोसिएटेड हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वे सुरक्षित तरीके से गर्भपात की प्रक्रिया पूरी कराएं।
MTP एक्ट के तहत गर्भपात के नियम क्या हैं?
भारत में गर्भपात के नियम Medical Termination of Pregnancy (MTP) Act, 1971 और इसके 2021 के संशोधन से चलते हैं। सामान्य तौर पर 20 हफ्ते तक एक डॉक्टर की सलाह पर और 20 से 24 हफ्ते के बीच दो डॉक्टरों की राय से गर्भपात कराया जा सकता है। नाबालिग दुष्कर्म पीड़िताएं इस विशेष श्रेणी में आती हैं। 24 हफ्ते से ज्यादा होने पर कोर्ट की अनुमति जरूरी होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर क्या कहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि नाबालिग पीड़ितों को सामाजिक डर और शर्म की वजह से रिपोर्ट करने में देरी होती है, जिससे समय सीमा निकल जाती है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से MTP एक्ट में बदलाव करने को कहा है ताकि नाबालिग दुष्कर्म पीड़ितों के लिए समय की पाबंदी खत्म की जा सके। कोर्ट का मानना है कि किसी भी महिला या नाबालिग पर उसकी मर्जी के खिलाफ गर्भधारण का दबाव नहीं डाला जा सकता क्योंकि यह उनके सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य के खिलाफ है।
केस से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया है कि ऐसे गंभीर मामलों की सुनवाई जल्दी पूरी होनी चाहिए और आरोपी की संपत्ति पीड़िता को दी जानी चाहिए। हाल ही में एक अन्य मामले में AIIMS में सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद एक बच्चा समय से पहले पैदा हुआ था, जिसे परिवार ने स्वीकार करने से मना कर दिया था। यह घटना दिखाती है कि ऐसे मामलों में कानूनी और नैतिक चुनौतियां कितनी जटिल होती हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MTP एक्ट के तहत कितने हफ्ते तक गर्भपात की अनुमति है?
MTP एक्ट के अनुसार 20 हफ्ते तक एक डॉक्टर और 20 से 24 हफ्ते के बीच दो डॉक्टरों की राय से गर्भपात संभव है। 24 हफ्ते के बाद विशेष परिस्थितियों में कोर्ट की अनुमति अनिवार्य होती है।
नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के लिए कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?
लखनऊ हाईकोर्ट ने 15 साल की पीड़िता के 22 सप्ताह के गर्भपात की अनुमति दी और KGMU के गांधी मेमोरियल अस्पताल को इसे सुरक्षित तरीके से करने का निर्देश दिया है।