Lucknow में हेल्थ एटीएम का होगा विस्तार, पुलिस संभालेगी ITMS और सेफ सिटी प्रोजेक्ट
Lucknow: लखनऊ के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और शहर की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। अब शहर में हेल्थ एटीएम का दायरा बढ़ाया जाएगा ताकि आम जनता को पैथोलॉजी और ब्लड प्रेशर जैसी जांचों के लिए अस्पतालों
Lucknow: लखनऊ के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और शहर की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। अब शहर में हेल्थ एटीएम का दायरा बढ़ाया जाएगा ताकि आम जनता को पैथोलॉजी और ब्लड प्रेशर जैसी जांचों के लिए अस्पतालों की लंबी लाइनों में न लगना पड़े। इसके साथ ही शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की जिम्मेदारी अब सीधे पुलिस विभाग के पास होगी।
लखनऊ स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने हेल्थ एटीएम के संचालन के लिए दिसंबर तक की समय-सीमा बढ़ा दी है। अब इन एटीएम को SGPGI संचालित करेगा। रखरखाव और संचालन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए 8 जुलाई 2026 को यह फैसला लिया गया कि सभी 100 हेल्थ एटीएम का जिम्मा एक निजी एजेंसी को सौंपा जाए। नियम यह है कि निजी एजेंसी जांच शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं कर सकती है। एजेंसी विज्ञापनों के जरिए कमाई करेगी और इसका एक हिस्सा नगर निगम के साथ साझा करेगी।
सरकार ने इन एटीएम की निगरानी के लिए एक एकीकृत कमांड कंट्रोल सेंटर बनाने के लिए 25 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि इससे अस्पतालों पर दबाव कम होगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पूरे प्रदेश के 4600 स्वास्थ्य केंद्रों पर हेल्थ एटीएम लगाने का लक्ष्य रखा था, जिनमें 30 से 60 तरह की जांचें मुफ्त की जा सकती हैं।
दूसरी तरफ, इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और सेफ सिटी प्रोजेक्ट्स को अब पुलिस विभाग को सौंपा जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 तक जारी किए गए 145.17 करोड़ रुपये के ई-चालान में से 131.71 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। ITMS का प्रबंधन पहले स्मार्ट सिटी देख रहा था, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया पुलिस के पास होगी।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया फंड के तहत 194.44 करोड़ रुपये की सेफ सिटी परियोजना शुरू की गई थी। इसमें स्मार्ट कंट्रोल रूम, पिंक आउट-पोस्ट और बसों में सुरक्षा इंतजाम शामिल हैं। पहले यह सिस्टम केवल ऑफिस समय के दौरान ही ठीक से काम कर रहा था, इसलिए अब इसे पूरी तरह पुलिस को सौंपने की तैयारी है। सरकार अब दूसरे चरण में 200 छोटे शहरों को भी इस दायरे में लाने के लिए अगले बजट में 50 करोड़ रुपये की मांग कर रही है।