UP : लखनऊ में गोमती नदी के किनारों पर हो रहे अवैध कब्जों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की सुस्ती पर नाराजगी जताई और सरकारी जमीन से कब्जा हटाने की कार्यवाही जल
UP : लखनऊ में गोमती नदी के किनारों पर हो रहे अवैध कब्जों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की सुस्ती पर नाराजगी जताई और सरकारी जमीन से कब्जा हटाने की कार्यवाही जल्द पूरी करने का आदेश दिया है। इस मामले में कोर्ट ने नीलांश ग्रुप को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
नीलांश ग्रुप पर क्या हैं आरोप और कोर्ट ने क्या कहा?
नीलांश ग्रुप, जिसमें नीलांश थीम वाटर पार्क और नीलांश बिल्डर्स जैसे नाम शामिल हैं, पर ग्राम बदैया और टिकरी कलां में गोमती नदी के रिवर बेड पर कब्जा कर उसे व्यावसायिक इस्तेमाल में लेने का आरोप है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की बेंच ने साफ किया कि पर्यावरण की वजह से नदी क्षेत्र में किसी भी तरह के स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने नीलांश ग्रुप को 7 जुलाई तक अपना हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
प्रशासन की लापरवाही पर कोर्ट की नाराजगी
कोर्ट ने पाया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत कार्रवाई की जानी थी, लेकिन इसे लगातार टाला गया। मलिहाबाद के एसडीएम ने 20 जनवरी 2020 को ही अवैध कब्जा हटाने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ। इस मामले में दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा महाराज ने 2024 में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसके बाद यह मामला कोर्ट पहुंचा।
आगे क्या होगा और सरकार को क्या निर्देश मिले?
हाईकोर्ट ने संबंधित तहसीलदार को निर्देश दिया है कि सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की जो अर्जी लंबित है, उसे जल्द से जल्द निस्तारित करें। साथ ही, न्यायालय ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि गोमती नदी के किनारे की इस खाली जमीन पर ग्रीन बेल्ट विकसित करने पर विचार किया जाए ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
गोमती रिवर बेड मामले में हाईकोर्ट ने किसे नोटिस जारी किया है?
कोर्ट ने नीलांश ग्रुप (नीलांश थीम वाटर पार्क, नीलांश प्रॉपर्टीज, नीलांश बिल्डर्स और उनके प्रमोटरों) को नोटिस जारी किया है और 7 जुलाई तक जवाब मांगा है।
यह मामला कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा महाराज ने 2024 में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी, जिसमें गोमती नदी के किनारों पर हो रहे अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया गया था।