Lucknow: पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से पति बरी, हाईकोर्ट ने कहा- विवाद या अलगाव आधार नहीं हो सकता

UP/Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज प्रताड़ना के मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि पति-पत्नी के बीच मामूली विवाद या

UP/Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज प्रताड़ना के मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि पति-पत्नी के बीच मामूली विवाद या अलग रहना आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं माना जा सकता। यह फैसला 7 अगस्त, 2026 को सुनाया गया।

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि आत्महत्या करने से करीब साढ़े पांच महीने पहले तक पति और पत्नी के बीच कोई संपर्क या बातचीत नहीं हुई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वैवाहिक जीवन में होने वाले झगड़ों या अलगाव को सीधे तौर पर उकसावे के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

दहेज प्रताड़ना के आरोपों पर कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष दहेज की मांग और भुगतान को सबूतों के साथ साबित करने में नाकाम रहा। रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों में गंभीर विसंगतियां पाई गईं, जिसके चलते पति को इन आरोपों से राहत मिली।

कोर्ट ने अपने फैसले में पिछले कानूनी उदाहरणों का भी जिक्र किया। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जून, 2026 को कहा था कि वैवाहिक जीवन में कुछ दिनों तक बातचीत बंद होना आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं है और इसके लिए ठोस सबूत जरूरी हैं। इसी तरह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी 5 जुलाई, 2025 को फैसला दिया था कि बिना विश्वसनीय साक्ष्य के विवादों को आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता।