UP : लखनऊ के जीपीओ पार्क में उत्तर प्रदेश के ग्राम प्रधानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ग्राम प्रधानों का कहना है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में प्रशासकों की नियुक्ति न की जाए और समय पर पंचायत चुनाव कराए जाएं। इस ब
UP : लखनऊ के जीपीओ पार्क में उत्तर प्रदेश के ग्राम प्रधानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ग्राम प्रधानों का कहना है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में प्रशासकों की नियुक्ति न की जाए और समय पर पंचायत चुनाव कराए जाएं। इस बीच उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे और भीषण गर्मी के कारण उन्हें पानी और मिठाई बांटकर राहत पहुंचाई।
ग्राम प्रधानों की मुख्य मांगें और विरोध का कारण
प्रदर्शन कर रहे ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। उनका तर्क है कि उन्हें गांव की जरूरतों और सरकारी योजनाओं की बेहतर जानकारी है, इसलिए चुनाव होने तक उन्हें ही जिम्मेदारी दी जाए या प्रशासक समिति बनाई जाए। प्रदर्शनकारियों ने ‘पंचायतों पर प्रशासक नहीं चलेगा’ और ‘ग्राम स्वराज हमारा अधिकार’ जैसे नारे लगाकर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन और बढ़ाया जाएगा।
सरकार का रुख और पंचायती राज विभाग का प्रस्ताव
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रधानों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हितों की रक्षा करेगी और उनकी बातें शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने ग्राम पंचायतों को लोकतंत्र की पहली इकाई बताया। वहीं, पंचायती राज विभाग ने मुख्यमंत्री को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें प्रशासकों की जगह जनप्रतिनिधियों की एक प्रशासक समिति बनाने की बात कही गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार के अनुसार, अभी कार्यकाल बढ़ाने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है।
चुनाव में देरी और बजट का क्या है मामला
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। यह आयोग छह महीने में अपनी रिपोर्ट देगा, जिसके बाद आरक्षण प्रक्रिया पूरी होगी। इस वजह से पंचायत चुनाव में देरी होने की संभावना है। दूसरी तरफ, कार्यकाल खत्म होने से पहले राज्य वित्त आयोग ने 13.60 करोड़ रुपये की अंतिम किस्त जारी की है, जिसे खर्च करने की तैयारी ग्राम प्रधानों ने तेज कर दी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल कब समाप्त हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद प्रशासक नियुक्ति की संभावना है।
पंचायत चुनाव में देरी क्यों हो सकती है?
पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिली है और उसकी रिपोर्ट आने में छह महीने लग सकते हैं, जिसके बाद ही आरक्षण प्रक्रिया और चुनाव संभव होंगे।