Lucknow में 2000 करोड़ की सरकारी जमीन हड़पने की साजिश, 10 पूर्व अफसरों पर गिरेगी गाज
Lucknow: राजधानी लखनऊ में सरकारी जमीन को हड़पने का एक बहुत बड़ा मामला सामने आया है। करीब 2000 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से हथियाने की कोशिश की गई। इस मामले में चकबंदी विभाग के 10 पूर्व अधिकारियों को दोषी
Lucknow: राजधानी लखनऊ में सरकारी जमीन को हड़पने का एक बहुत बड़ा मामला सामने आया है। करीब 2000 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से हथियाने की कोशिश की गई। इस मामले में चकबंदी विभाग के 10 पूर्व अधिकारियों को दोषी पाया गया है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
यह पूरा मामला 1988-1989 के आसपास शुरू हुआ था। आरोप है कि चकबंदी विभाग के एक फर्जी आदेश के जरिए छह गांवों की करीब 120 बीघा सरकारी जमीन, जिसमें बंजर भूमि और चरागाह शामिल थे, उन्हें हड़पने की साजिश रची गई। यह जमीन देवा रोड, बीकेटी, इंदिरानगर और जानकीपुरम जैसे इलाकों में स्थित है। साल 2020 में जब इस जमीन को खतौनी में दर्ज कराने की कोशिश हुई, तब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा। इसके बाद 2021 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने पांच सदस्यों की एक जांच कमेटी बनाई थी।
जांच रिपोर्ट 5 अगस्त 2026 को सामने आई, जिसके आधार पर अब कार्रवाई शुरू हुई है। जानकीपुरम थाने में भू-माफियाओं के गुर्गों रामेंद्र कुमार, अमित, सुनील कुमार और लईक खां के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस घोटाले में कई बड़े अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। जांच के दायरे में तत्कालीन उप संचालक चकबंदी एस.के. भट्ट, एस.के. सिंह, राम मंगल सिंह, चकबंदी अधिकारी शैलेश शाही, सहायक चकबंदी अधिकारी सत्य प्रकाश मिश्रा, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी दूधनाथ पांडेय और अपर आयुक्त चकबंदी महेंद्र सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
चकबंदी आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद ने साफ किया है कि दोषी पाए गए अधिकारियों पर सख्त एक्शन होगा और जरूरत पड़ी तो सरकारी नुकसान की वसूली भी की जाएगी। डीसीपी उत्तरी अमित कुमार आनंद ने बताया कि पुलिस 1988 से अब तक तैनात रहे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्योरा मांग रही है और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे।