Lucknow में गोंड समुदाय का प्रदर्शन, पूरे UP में ST दर्जा देने की मांग

Lucknow: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर 9 अगस्त 2026 को लखनऊ में ऑल गोंडवाना स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AGSA) ने बड़ा प्रदर्शन किया। संगठन ने मांग की है कि गोंड (धुरिया) जाति को पूरे उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्

Lucknow: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर 9 अगस्त 2026 को लखनऊ में ऑल गोंडवाना स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AGSA) ने बड़ा प्रदर्शन किया। संगठन ने मांग की है कि गोंड (धुरिया) जाति को पूरे उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिया जाए। इस प्रदर्शन के जरिए समुदाय ने अपनी पहचान और अधिकारों के लिए आवाज उठाई है।

प्रदर्शनकारियों ने लखनऊ के जीपीओ स्थित महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया और वहां से झूलेलाल पार्क तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकाला। इस मार्च में प्रदेशभर से गोंड समाज के लोग शामिल हुए। संगठन का कहना है कि वर्तमान में गोंड (धुरिया) समुदाय को यूपी के केवल 17 जिलों में ही ST की मान्यता मिली हुई है, जबकि बाकी जिलों में स्थिति अलग है। उनकी मांग है कि इस भेदभाव को खत्म कर पूरे प्रदेश में समान दर्जा मिले।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2022 में केंद्र सरकार ने यूपी के 13 जिलों में गोंड जाति और उनकी पांच उपजातियों (धुरिया, नायक, ओझा, पठारी और राजगोंड) को SC से हटाकर ST श्रेणी में शामिल किया था। इसके बाद दिसंबर 2022 में संसद ने चंदौली, कुशीनगर, संतकबीर नगर और भदोही जैसे चार और जिलों के लिए विधेयक पारित किया, जिसके बाद मार्च 2023 में प्रमाण पत्र जारी करने का फैसला हुआ।

लखनऊ के अलावा बस्ती और चंदौली में भी आदिवासी समुदायों ने अपनी मांगें रखीं। बस्ती में आदिवासी नेताओं की प्रतिमाएं लगाने और संस्कृति को बढ़ावा देने की मांग हुई। वहीं चंदौली में वनाधिकार, आरक्षण और आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना समेत नौ सूत्रीय मांगें उठाई गईं। इसके साथ ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 में एसटी वर्ग के लिए दो प्रतिशत आरक्षण की मांग भी की गई है। बक्सर में गोंडी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और 9 अगस्त को सरकारी छुट्टी घोषित करने की मांग उठी है।