Lucknow में गोमती नदी का अस्तित्व खतरे में, गंदे नालों और अतिक्रमण से नदी बनी नाला
Lucknow: राजधानी लखनऊ की जीवनदायिनी गोमती नदी की हालत बेहद खराब हो चुकी है. जिस पानी को लोग कभी पीते थे, आज वह हाथ धोने लायक भी नहीं बचा है. शहर के गंदे नाले सीधे नदी में गिर रहे हैं और कई जगहों पर प्राकृतिक धारा को रोक
Lucknow: राजधानी लखनऊ की जीवनदायिनी गोमती नदी की हालत बेहद खराब हो चुकी है. जिस पानी को लोग कभी पीते थे, आज वह हाथ धोने लायक भी नहीं बचा है. शहर के गंदे नाले सीधे नदी में गिर रहे हैं और कई जगहों पर प्राकृतिक धारा को रोक दिया गया है, जिससे नदी अब एक नाले जैसी दिखने लगी है.
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, गोमती का जलस्तर लगातार गिर रहा है और इसकी 26 सहायक नदियों में से 22 पूरी तरह सूख चुकी हैं. नदी का प्रवाह लगभग 60% तक कम हो गया है. कुड़िया घाट, मेहंदी घाट, रिवर फ्रंट और मनकामेश्वर घाट जैसे प्रमुख स्थानों पर पानी बहुत ज्यादा दूषित हो गया है. नदी के बीचों-बीच मिट्टी के टीले उभर आए हैं और हर दिन करीब 10 मीट्रिक टन कचरा, प्लास्टिक और निर्माण सामग्री इसमें फेंका जा रहा है.
BBAU के पर्यावरणविद् प्रो. वेंकटेश दत्ता ने बताया कि रिवरफ्रंट के दौरान बनाई गई 16 मीटर गहरी कंक्रीट की दीवार ने नदी और भूजल के बीच के प्राकृतिक संपर्क को खत्म कर दिया है. उनके अनुसार, लखनऊ का लगभग आधा सीवेज बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदी में जा रहा है. पिछले 10 सालों में मल प्रदूषण का स्तर मानक से 26 गुना ज्यादा बढ़ गया है, जिससे जलीय जीवन और मछलियां लगभग खत्म हो गई हैं.
| प्रमुख समस्या | प्रभाव/विवरण |
|---|---|
| प्रदूषण स्रोत | हैदर नाला, कुकरैल और घसियारी मंडी नाले का सीधा गंदा पानी |
| सहायक नदियाँ | 26 में से 22 नदियाँ पूरी तरह सूख चुकी हैं |
| कचरा डंपिंग | प्रतिदिन लगभग 10 मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट और प्लास्टिक |
| प्रदूषण स्तर | मल प्रदूषण (टोटल कोलीफॉर्म) मानक से 26 गुना अधिक |
| जल प्रवाह | नदी के बहाव में 60% तक की कमी आई है |
| अतिक्रमण | कंक्रीट की दीवारों और अवैध कब्जों से नदी का विस्तार कम हुआ |
हालात सुधारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘क्लीन गोमती 2026’ मिशन शुरू किया है. इस योजना का लक्ष्य अनुपचारित सीवेज को रोकना और नदी को फिर से स्वच्छ बनाना है. इसके अलावा, कुड़िया घाट पर जनभागीदारी बढ़ाने के लिए ‘रिवर योग’ अभियान भी चलाया गया है. सरकार राष्ट्र प्रेरणा स्थल से इकाना स्टेडियम तक नदी के किनारे पर्यटन और वेलनेस सेंटर विकसित करने की योजना भी बना रही है, जिसे 2027 से 2035 के बीच पूरा किया जाएगा.