Lucknow में गोमती नदी से निकाला गया 15 कुंतल कचरा, स्वच्छ पर्यावरण आंदोलन सेना ने चलाया 423वां अभियान
Lucknow: राजधानी लखनऊ की गोमती नदी को साफ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक बड़ी मुहिम चलाई जा रही है। रविवार, 28 जून 2026 को स्वच्छ पर्यावरण आंदोलन सेना की टीम ने नदी की सफाई का अपना 423वां रविवार सफलतापूर्वक पूरा किया।
Lucknow: राजधानी लखनऊ की गोमती नदी को साफ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक बड़ी मुहिम चलाई जा रही है। रविवार, 28 जून 2026 को स्वच्छ पर्यावरण आंदोलन सेना की टीम ने नदी की सफाई का अपना 423वां रविवार सफलतापूर्वक पूरा किया। इस अभियान का मुख्य मकसद नदी को फिर से निर्मल बनाना और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना था।
यह सफाई अभियान हनुमान सेतु के पास झूलेलाल पार्क स्थित गोमती नदी के तट पर आयोजित किया गया। करीब दो घंटे तक चले इस श्रमदान में स्वयंसेवकों ने नदी से लगभग 15 कुंतल कचरा बाहर निकाला। इस कचरे में मुख्य रूप से प्लास्टिक की बोतलें, पुराने कपड़े और पूजा सामग्री शामिल थी, जो नदी के पानी को प्रदूषित कर रहे थे।
अभियान का नेतृत्व संयोजक रणजीत सिंह ने किया। उनके साथ प्रीति जैन, रत्ना वर्मा, शिखा सिंह, शगुन तिवारी, शक्ति तिवारी, पलक, पिंकी, उदय सिंह, विष्णु तिवारी, विवेक जोशी, कमल दुबे, वीरेंद्र जोशी, कमलेश चौधरी, रिंकू सिंह, परवेश यादव, अजय जोशी, पवन, परमेश जोशी, रामकुमार वाल्मीकि, आनंद वर्मा, ललित कश्यप, मनोज सिंह, शैलेन्द्र सिन्हा, सूर्या दुबे, अर्नव जैन, हिमांशु कश्यप, पंकज तिवारी, जे.पी. गुप्ता, संकल्प शर्मा और राजेश जोशी जैसे कई स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।
सफाई के दौरान मौजूद लोगों ने नदी में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार से मांग की कि शहर के सभी बड़े नालों पर आधुनिक STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाए जाएं। उनका कहना है कि जब तक गंदा पानी बिना साफ हुए नदी में गिरेगा, तब तक गोमती को पूरी तरह स्वच्छ करना मुश्किल होगा।
गोमती की सफाई के लिए पिछले कुछ समय से कई प्रयास हो रहे हैं। 21 जून को योग दिवस पर भी इसी टीम ने 30 कुंतल कचरा निकाला था। वहीं, 6 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन और विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना और महापौर सुषमा खर्कवाल ने नदी की सफाई के लिए 12 नई नावें और एक आधुनिक ट्रैश स्टीमर की शुरुआत की थी। इससे पहले फरवरी 2026 में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला भी हुई थी, जिसका लक्ष्य 2026 तक गोमती को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाना है।