Lucknow अग्निकांड: सस्पेंडेड अधिकारी के दो वीडियो वायरल, पहले CM योगी से की शिकायत फिर मांगी माफी
Lucknow: लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इस मामले में निलंबित किए गए फायर स्टेशन सेकेंड ऑफिसर (FSSO) कमलेंद्र कुमार सिंह के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिससे मामले ने नया
Lucknow: लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इस मामले में निलंबित किए गए फायर स्टेशन सेकेंड ऑफिसर (FSSO) कमलेंद्र कुमार सिंह के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पहले वीडियो में उन्होंने अपनी सस्पेंशन को गलत बताया था, जबकि दूसरे वीडियो में उन्होंने अपनी गलती मानकर माफी मांगी है।
वायरल वीडियो के मुताबिक, कमलेंद्र कुमार सिंह ने पहले वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई अन्यायपूर्ण है और इस पूरी घटना के साथ-साथ दमकल की प्रक्रिया में हुई देरी के लिए चीफ फायर ऑफिसर (CFO) जिम्मेदार हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने एक दूसरा वीडियो जारी किया जिसमें कहा कि पिछला बयान उन्होंने आवेश और भ्रम की स्थिति में दिया था, जिसके लिए वह माफी चाहते हैं।
इस अग्निकांड को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में FSSO कमलेंद्र कुमार सिंह के अलावा जानकीपुरम कलेक्शन के अधिशासी अभियंता गौरव कुमार, LDA के सहायक अभियंता अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे शामिल हैं। इसके साथ ही पुलिस ने बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, रामकृष्ण उपाध्याय, तुषांक कृष्णा जायसवाल और स्टूडियो संचालक सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया है।
मामले की गहराई से जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस टीम में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत और लखनऊ जोन के अपर पुलिस डीजी प्रवीण कुमार शामिल हैं। SIT को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर सबूत जुटाए हैं।
जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी वह आवासीय उपयोग के लिए थी, लेकिन वहां अवैध रूप से व्यावसायिक काम चल रहा था और बिल्डिंग के पास फायर NOC भी नहीं था। LDA ने 2016 में इस अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया था, लेकिन वह आदेश दो महीने के अंदर ही रद्द कर दिया गया। फिलहाल अलीगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।