Lucknow अग्निकांड में बड़ा खुलासा, 20 किलोवाट के कनेक्शन पर 34 किलोवाट का लोड, 4 अधिकारी निलंबित

Lucknow: अलीगंज में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड की शुरुआती जांच में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिस इमारत में आग लगी, वहां स्वीकृत बिजली कनेक्शन केवल 20 किलोवाट का था, लेकिन असल में वहां 34 किलोवाट तक का ल

Lucknow: अलीगंज में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड की शुरुआती जांच में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिस इमारत में आग लगी, वहां स्वीकृत बिजली कनेक्शन केवल 20 किलोवाट का था, लेकिन असल में वहां 34 किलोवाट तक का लोड इस्तेमाल किया जा रहा था। इस हादसे में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है और 9 लोग घायल हैं।

जांच में पता चला है कि इमारत का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा था, जबकि इसे आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। साल 2014 में नियमों के खिलाफ इसे कमर्शियल बिल्डिंग में बदला गया और 2016 में इसे गिराने का आदेश भी आया था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया। इमारत में न तो फायर सेफ्टी के इंतजाम थे और न ही बाहर निकलने का कोई सही रास्ता था। नगर विकास और ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के मुताबिक, आग एसी डक्ट से लगने की आशंका है, जिससे धुआं अंदर जमा हो गया और दम घुटने से कई लोगों की मौत हुई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया और घटनास्थल का दौरा कर दो सदस्यीय SIT का गठन किया है। इस SIT में पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के ADG प्रवीण कुमार शामिल हैं। उन्हें सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। सीएम ने साफ किया है कि लापरवाही बरतने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।

विवरण जानकारी
स्वीकृत लोड 20 किलोवाट
वास्तविक लोड 34 किलोवाट
कुल मौतें 15 लोग
निलंबित अधिकारी 4 (EE गौरव कुमार, FSO कमलेंद्र कुमार सिंह, AE अनिल कुमार, JE प्रमोद पांडे)
गिरफ्तार आरोपी 3 (रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल)
SIT समय सीमा 7 दिन

बिजली विभाग के रिकॉर्ड में गड़बड़ी भी मिली है, जहां कनेक्शन की तारीख 1 जनवरी 1911 दर्ज है। लेसा अधिकारियों ने बताया कि कनेक्शन बिन्द्रा प्रसाद शुक्ला के नाम पर था। जानकीपुरम जोन के मुख्य अभियंता वीपी सिंह ने कहा कि डिमांड बढ़ने का जुर्माना उपभोक्ता से लिया जाएगा और एनओसी की जांच की जा रही है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यूपी अग्निशमन सेवा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।