Lucknow अग्निकांड में LDA के 18 अधिकारी दोषी, CM योगी के निर्देश पर 4 निलंबित और 4 गिरफ्तार

Lucknow: राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की जांच में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए हैं। इस हादसे में रिहायशी बिल्डिंग का कमर्शियल इस्तेमाल और फायर सेफ्ट

Lucknow: राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की जांच में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए हैं। इस हादसे में रिहायशी बिल्डिंग का कमर्शियल इस्तेमाल और फायर सेफ्टी के नियमों की अनदेखी सामने आई है।

LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने फाइलों की समीक्षा करने के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश शासन को भेज दी है। इन 18 लोगों में पांच जोनल अधिकारी और तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव भी शामिल हैं। दुर्गेश श्रीवास्तव ने साल 2016 में अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने खुद ही उस आदेश को निरस्त कर दिया था।

जांच में पता चला कि जिस इमारत में आग लगी, उसका नक्शा सिर्फ रहने के लिए पास हुआ था, लेकिन वहां दुकान और सेंटर चलाए जा रहे थे। बिल्डिंग में न तो आग बुझाने के सही इंतजाम थे और न ही धुआं बाहर निकलने का रास्ता था, जिससे हादसा और गंभीर हो गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश भर में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने दोषियों को पकड़ने के लिए एक SIT का गठन किया है, जिसमें अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी प्रवीण कुमार शामिल हैं। SIT को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

मुख्यमंत्री के आदेश पर अब तक चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इनमें बिजली विभाग के गौरव कुमार, फायर विभाग के कमलेंद्र कुमार सिंह, LDA के अनिल कुमार और प्रमोद पांडे शामिल हैं। वहीं पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, पेट शॉप मालिक रामकृष्ण उपाध्याय, एनिमेशन सेंटर संचालक तूशॉक कृष्णा जायसवाल और किरायेदार सुरेश कुमार शाहू को गिरफ्तार कर लिया है। धीरेंद्र और सुरेंद्र शुक्ला की तलाश अभी जारी है।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकुश मित्तल ने बताया कि आग बुझाने में करीब साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च आया है। यह पूरी रकम भवन मालिक और जिम्मेदार लोगों से वसूली जाएगी। दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली विभाग के इंजीनियर के निलंबन को गलत बताया है और इसकी तकनीकी जांच की मांग की है।