Lucknow अग्निकांड: 2016 में गिराने का आदेश फिर वापस लिया, LDA की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

Lucknow: अलीगंज इलाके की एक तीन मंजिला इमारत में सोमवार, 22 जून 2026 को भीषण आग लग गई। इस हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और 9 लोग घायल हुए हैं। इस इमारत में एक कोचिंग सेंटर और एक कैफे चल रहा था। अब इस हादसे के

Lucknow: अलीगंज इलाके की एक तीन मंजिला इमारत में सोमवार, 22 जून 2026 को भीषण आग लग गई। इस हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और 9 लोग घायल हुए हैं। इस इमारत में एक कोचिंग सेंटर और एक कैफे चल रहा था। अब इस हादसे के बाद बिल्डिंग के पुराने कागजात और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच में सामने आया है कि इस बिल्डिंग में अवैध निर्माण हुआ था, जिसके कारण LDA ने 10 मई 2016 को इसे गिराने का आदेश दिया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महज दो महीने बाद 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को वापस ले लिया गया। यह बिल्डिंग मूल रूप से 1980 में रिहायशी इस्तेमाल के लिए दी गई थी, लेकिन बाद में यहां बेसमेंट खोदकर बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी गई। LDA ने नोटिस तो जारी किया, लेकिन नक्शा रद्द नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दो सदस्यीय SIT का गठन किया है, जिसे सात दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। लापरवाही बरतने के आरोप में चार अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है, जिनमें गौरव कुमार (XEN कलेक्शन), कमलेंद्र कुमार सिंह (FSSO), एई अनिल कुमार और प्रमोद पांडे शामिल हैं।

इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। इनमें से पहले तीन लोग बिल्डिंग के संयुक्त मालिक बताए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जताया है और मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये तथा घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये देने का ऐलान किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री से पूरी स्थिति की जानकारी ली। फिलहाल राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लिया है।