Lucknow अग्निकांड के बाद UP सरकार सख्त, लापरवाही पर SIT गठित और बसों की होगी जांच
Lucknow: राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की जान गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। अब इस मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है और दोषियों के खिलाफ कानून
Lucknow: राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की जान गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। अब इस मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जांच में यह बात सामने आई कि जिस बिल्डिंग में आग लगी, वहां बिजली का लोड तय सीमा से कहीं ज्यादा था। इमारत 20 किलोवाट की स्वीकृत सीमा के बजाय 34 केवीए से अधिक लोड पर चल रही थी। हैरानी की बात यह है कि एमसीबी गिरने की शिकायतें पहले से थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। साथ ही, इस इमारत को 2016 में गिराने का आदेश हुआ था, जिसे बाद में पैसों के प्रभाव में रद्द कर दिया गया था। अब Lucknow Development Authority (LDA) ने इसे फिर से ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है और पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय SIT का गठन किया है। पुलिस ने बिल्डिंग मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है और छह FIR दर्ज की हैं। लापरवाही बरतने वाले बिजली, अग्निशमन और LDA विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
इस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने भी कमर कस ली है। 25 जून से पूरे राज्य में 30 दिनों का विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जो 23 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान स्लीपर, स्कूल और कॉन्ट्रैक्ट बसों में अग्निशमन यंत्रों की जांच होगी। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने साफ किया है कि बिना फायर एक्सटिंगुइशर वाले वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।
सड़क हादसों को रोकने के लिए अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सड़कों से अतिक्रमण हटाएं और हाईवे पर शराब की दुकानों पर लगाम लगाएं। सरकार ने यह भी तय किया है कि जो वाहन बार-बार दुर्घटनाओं में शामिल होंगे, उन्हें ‘कंडम’ यानी कबाड़ घोषित कर दिया जाएगा। इसके अलावा, तीन से ज्यादा मौतों वाली सड़क दुर्घटनाओं की जांच के लिए एक विशेष निगरानी सेल बनाया गया है।
इस घटना पर राजनीति भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने इसे व्यवस्था की विफलता बताया है और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की है। वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी को इस त्रासदी का मुख्य कारण बताया है।