Lucknow अग्निकांड: सस्पेंड अधिकारी ने CM योगी को लिखी चिट्ठी, CFO पर लगाया लापरवाही का आरोप

Lucknow: राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर खींचतान शुरू हो गई है। इस हादसे में निलंबित किए गए फायर स्टेशन सेकंड ऑफिसर (FSSO) कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक खुला पत्र लिखकर

Lucknow: राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर खींचतान शुरू हो गई है। इस हादसे में निलंबित किए गए फायर स्टेशन सेकंड ऑफिसर (FSSO) कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक खुला पत्र लिखकर अपने सस्पेंशन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि बिल्डिंग की फायर सेफ्टी और क्लीयरेंस की जिम्मेदारी उनकी नहीं, बल्कि मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) की थी।

घटनाक्रम के मुताबिक, 22 जून 2026 को लखनऊ में एक इमारत में आग लगी थी, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और 9 लोग घायल हुए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि ज्यादातर मौतें दम घुटने की वजह से हुई थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे के बाद सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिकारियों को सस्पेंड किया था और बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार करवाया था।

निलंबित अधिकारी कमलेंद्र सिंह का कहना है कि जिस इमारत में आग लगी, वह मूल रूप से आवासीय थी, लेकिन वहां अवैध रूप से कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और 3D आर्ट स्टूडियो चल रहे थे। उनके मुताबिक, ऐसी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए CFO से फायर क्लीयरेंस लेना कानूनी रूप से जरूरी होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आग बुझाने में देरी भी CFO की लापरवाही की वजह से हुई, इसलिए कार्रवाई उनके बजाय CFO पर होनी चाहिए।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने एक दो सदस्यीय विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है, जिसमें अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी प्रवीण कुमार शामिल हैं। SIT को 29 जून 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के खिलाफ राज्यव्यापी जाँच अभियान शुरू कर दिया गया है, जिसके तहत अब तक 100 से ज्यादा संस्थानों को सील किया जा चुका है।

जाँच में यह भी सामने आया कि इस इमारत को गिराने का आदेश 2016 में ही जारी हो गया था, लेकिन रहस्यमयी तरीके से दो महीने के भीतर उस आदेश को रद्द कर दिया गया। फिलहाल लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भी इस मामले में आंतरिक जाँच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।