Lucknow अग्निकांड में 15 मौतों का जिम्मेदार कौन, SIT की जांच में 30 अफसर घिरे, बड़ी कार्रवाई की तैयारी

Lucknow: लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने अब प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी, जिसकी जांच कर रही SIT ने अपनी रिपोर्ट में 30 अधिकारियों की लापरवाही पकड़ी है। सरकार अब इन अफसरो

Lucknow: लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने अब प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी, जिसकी जांच कर रही SIT ने अपनी रिपोर्ट में 30 अधिकारियों की लापरवाही पकड़ी है। सरकार अब इन अफसरों पर सख्त एक्शन लेने की तैयारी कर रही है क्योंकि जांच में पाया गया कि इनकी अनदेखी की वजह से यह हादसा हुआ।

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने इस मामले में बहुत कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए थे और SIT को सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि जिस बिल्डिंग में आग लगी, उसके कमर्शियल बिजली कनेक्शन के लिए 2016 में Directorate of Electrical Safety से फर्जी NOC ली गई थी। इतना ही नहीं, इस बिल्डिंग को 2016 में अवैध निर्माण के कारण गिराने का आदेश भी हुआ था, लेकिन महज दो महीने में उस आदेश को रद्द कर दिया गया।

इस मामले में अब तक कई बड़ी गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। बिल्डिंग मालिक Virendra Shukla को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। साथ ही एनिमेशन स्टूडियो के फाउंडर Tushank Jaiswal, मैनेजर Ramkrishna Upadhyay और Suresh Kumar Shahu को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। प्रशासन अब इस अवैध कमर्शियल कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर रहा है।

Lucknow Development Authority (LDA) ने भी अपनी जवाबदेही तय की है। LDA ने 19 इंजीनियरों और जोनल अफसरों के नाम सरकार को भेजे हैं, जिनमें 6 PCS लेवल के अधिकारी शामिल हैं। ये अधिकारी 2016 से अलीगंज इलाके में अवैध निर्माण की निगरानी के लिए जिम्मेदार थे। इनके अलावा बिजली विभाग और फायर विभाग के चार अधिकारियों को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है।

हादसे के बाद सरकार और केंद्र ने पीड़ितों के लिए आर्थिक मदद का ऐलान किया है। मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की तरफ से 5 लाख रुपये और केंद्र की तरफ से 2 लाख रुपये दिए जाएंगे। वहीं घायलों के लिए दोनों तरफ से 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि तय की गई है। डिप्टी सीएम Brajesh Pathak ने इस अवैध निर्माण के लिए पिछली अखिलेश यादव सरकार के समय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।