Lucknow अग्निकांड: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, आग से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई 15 लोगों की मौत

Lucknow: राजधानी लखनऊ के अलीगंज में सोमवार को हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, लेकिन अब उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट

Lucknow: राजधानी लखनऊ के अलीगंज में सोमवार को हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, लेकिन अब उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति की मौत आग से झुलसने के कारण नहीं हुई, बल्कि जहरीली गैस और धुएं से दम घुटने की वजह से उनकी जान गई।

डॉक्टरों ने बताया कि मृतकों के शरीर पर जलने के गंभीर निशान नहीं मिले हैं। हालांकि, उनके चेहरे और आंखों के पास सूजन थी और नाक के अंदर कालिख और धुएं के कण पाए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि बंद कमरे में जब प्लास्टिक, पीवीसी और बिजली की वायरिंग जलती है, तो कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन क्लोराइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। ये गैसें शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देती हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में इंसान की मौत हो जाती है।

यह हादसा 22 जून 2026 को एक अवैध व्यावसायिक भवन में हुआ, जहां एनिमेशन सेंटर और पेट क्लिनिक चल रहे थे। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को वजह माना जा रहा है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में डिजिटल लॉक फंसने की बात कही गई है, जिसकी वजह से लोग बाहर नहीं निकल पाए। इस इमारत की ऊंचाई 19 मीटर थी, लेकिन यहां न तो वेंटिलेशन था और न ही आपातकालीन निकास का कोई रास्ता।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना के बाद सख्त एक्शन लिया है। उन्होंने दो सदस्यीय SIT का गठन किया है, जिसे सात दिनों में रिपोर्ट देनी है। इस मामले में LDA, अग्निशमन और विद्युत विभाग के चार अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। पुलिस ने भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला, एनिमेशन सेंटर संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल और पेट शॉप मालिक रामकृष्ण उपाध्याय समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। LDA की जांच में 2016 से 2019 के बीच तैनात 19 अधिकारियों और इंजीनियरों को भी दोषी पाया गया है।

विवरण जानकारी
मुआवजा (मृतक परिजन) 2 लाख रुपये (PM मोदी द्वारा) + राज्य सरकार का मुआवजा
मुआवजा (घायल) 50,000 रुपये (PM मोदी द्वारा)
गिरफ्तार आरोपी 4 (भवन मालिक और संचालक शामिल)
सस्पेंड अधिकारी 4 (LDA, फायर और बिजली विभाग)
SIT रिपोर्ट की समयसीमा 7 दिन
अग्निशमन खर्च वसूली 3.5 लाख रुपये (भवन मालिक से)

अब प्रशासन पूरे लखनऊ में अवैध व्यावसायिक भवनों की सघन जांच कर रहा है। कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, होटल और नर्सिंग होम की जांच की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों को सील किया जाएगा।