Lucknow अग्निकांड: मुख्य आरोपी वीरेंद्र शुक्ला समेत 4 जेल भेजे गए, 15 लोगों की मौत के बाद LDA गिराएगा अवैध इमारत
Lucknow: राजधानी के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य आरोपी वीरेंद्र शुक्ला और तीन अन्य आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस दर्दनाक हादसे म
Lucknow: राजधानी के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य आरोपी वीरेंद्र शुक्ला और तीन अन्य आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की जान गई थी, जिनमें ज्यादातर छात्र और कम उम्र के कर्मचारी थे।
यह घटना 23 जून 2026 को एक कोचिंग सेंटर में लगी आग की वजह से हुई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वीरेंद्र शुक्ला, तुषार जायसवाल, रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान वीरेंद्र शुक्ला ने सीने में दर्द का बहाना बनाकर बचने की कोशिश की, लेकिन मेडिकल जांच में उन्हें फिट पाया गया और कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद घटना स्थल का दौरा किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने बेसमेंट में कोचिंग और किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगा दी है। मामले की गहराई से जांच के लिए एक SIT का गठन किया गया है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भी इस मामले में बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में पाया गया कि रिहायशी बिल्डिंग का इस्तेमाल व्यावसायिक काम के लिए हो रहा था और वहां आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं थे। LDA ने 18 अधिकारियों और इंजीनियरों को लापरवाही का दोषी माना है और अवैध इमारत को गिराने की तैयारी कर ली है। भवन मालिकों को 15 दिनों के भीतर जवाब देने का नोटिस दिया गया है।
प्रशासन ने इस मामले में जानकीपुरम जोन के अधिशासी अभियंता गौरव कुमार, फायर सेफ्टी ऑफिसर कमलेंद्र कुमार सिंह, सहायक अभियंता अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे को निलंबित कर दिया है। हालांकि, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कार्यकारी अभियंता के निलंबन का विरोध किया है। उनका कहना है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी और इंजीनियर इसके लिए सीधे जिम्मेदार नहीं हैं, इसलिए तकनीकी जांच होनी चाहिए।
इस हादसे के बाद पूरे प्रदेश में कोचिंग सेंटरों की जांच शुरू हो गई है। कई सेंटरों को सील कर दिया गया है और कुछ ने खुद ही अपने संस्थान बंद कर दिए हैं ताकि सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।