Lucknow में नकली दवाओं के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़, GST चोरी और फर्जी बिलिंग के जरिए चल रहा था खेल

Lucknow: राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं के एक बहुत बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और पुलिस ने मिलकर इस गिरोह को पकड़ा है, जो फर्जी बिलिंग, जीएसटी चोरी और लाइसेंस के गलत इस्तेमाल के जर

Lucknow: राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं के एक बहुत बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और पुलिस ने मिलकर इस गिरोह को पकड़ा है, जो फर्जी बिलिंग, जीएसटी चोरी और लाइसेंस के गलत इस्तेमाल के जरिए नकली दवाएं बाजार में बेच रहा था। इस पूरे खेल में करोड़ों रुपये का लेन-देन शामिल है और लखनऊ को इस नेटवर्क के मुख्य वितरण केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।

जुलाई के महीने में FSDA ने कई चरणों में छापेमारी की। 6 जुलाई को आलमबाग में पहली बार नकली दवाओं की खेप पकड़ी गई थी, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ा। 19 जुलाई को अमीनाबाद में एक अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की एलोपैथिक दवाएं जब्त की गईं। जांच में पता चला कि ये दवाएं राजस्थान में बनती थीं और लखनऊ के रास्ते पूरे उत्तर प्रदेश में सप्लाई की जा रही थीं। इस मामले में भूपेंद्र शर्मा, रंजीत सिंह जुल्का और राज विक्रम सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।

कार्रवाई यहीं नहीं रुकी, 24 जुलाई को गाजियाबाद से गिरोह के मुख्य सप्लायर राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद देहरादून में एक अवैध दवा फैक्ट्री का भी पता चला। 25 जुलाई को 18 औषधि निरीक्षकों की टीम ने अमीनाबाद इलाके में छापेमारी कर 15.50 लाख रुपये की दवाएं जब्त कीं और 32 सैंपल जांच के लिए भेजे।

FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि यह सिंडिकेट बहुत चालाकी से काम कर रहा था। ये लोग रद्द हो चुके ड्रग लाइसेंस और फर्जी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि जीएसटी की चोरी हो सके। कई फर्मों के बीच केवल कागजों पर लेनदेन दिखाया गया, जबकि असल में कोई दवा सप्लाई नहीं हुई।

दोषी फर्मों के नाम मुख्य आरोपी
मिश्रा एसोसिएट्स, मिश्रा मेडिकल एजेंसी, श्री अशोक फार्मास्युटिकल्स, भारत फार्मा, एम.डी.एच. फार्मा मनीष मिश्रा, आमोद कुमार मिश्रा, सन्नी कश्यप, देवेंद्र शुक्ला, राहुल

इस मामले में नौ संदिग्ध फर्मों जैसे एसकेजी मेडिकल्स, गायत्री फार्मा, हेल्थ प्लस और अन्य का संचालन रोक दिया गया है और उन्हें सील कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस तरह के कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। अब सभी जिलों के ड्रग निरीक्षकों को अलर्ट किया गया है कि वे थोक दवा कारोबारियों और एजेंटों पर कड़ी नजर रखें।